चंडीगढ़, 30 नवंबर 2025: ब्यूरो ऑफ़ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) ने नया IS 1893 (2025) भूकंप मानचित्र जारी किया है, जिसने पंजाब और उसके आसपास के क्षेत्रों के लिए भूकंप जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। नए मानचित्र के अनुसार अब देश का 61% हिस्सा मध्यम से उच्च भूकंप जोखिम वाले क्षेत्रों में आ गया है, जबकि देश की 75% आबादी सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में रहती है।
सबसे बड़ा बदलाव नए और सबसे खतरनाक ‘ज़ोन VI’ को शामिल करना है। पहले देश को केवल चार भूकंपीय ज़ोन में बांटा गया था, लेकिन अब कुल पाँच ज़ोन बना दिए गए हैं।
पंजाब और आसपास के क्षेत्रों पर बड़ा असर
चंडीगढ़ और पंचकूला अब ‘ज़ोन VI’ में
नए मानचित्र में चंडीगढ़ और पंचकूला को देश के सबसे खतरनाक भूकंप ज़ोन—ज़ोन VI (अत्यधिक जोखिम)—में रखा गया है।
इसका मतलब है:
ये क्षेत्र भविष्य में गंभीर और तीव्र भूकंपों की चपेट में आ सकते हैं।
यहाँ इमारतों के निर्माण के लिए अब अत्यंत सख़्त मानकों का पालन अनिवार्य होगा।
दोनों शहर हिमालय की सक्रिय फॉल्ट लाइनों के बेहद नज़दीक स्थित हैं।
अमृतसर–जालंधर ‘ज़ोन V’ में
पंजाब के प्रमुख शहर अमृतसर और जालंधर को ज़ोन V (बहुत उच्च जोखिम) में शामिल किया गया है।
इसी श्रेणी में हरियाणा के अंबाला और करनाल भी आते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस ज़ोन में तेज़ और विनाशकारी भूकंप आने की संभावना अधिक रहती है।
निर्माण मानकों में सख़्ती
ज़ोन VI और ज़ोन V में इमारतों के निर्माण नियम अब बहुत कड़े हो जाएंगे:
नींव को 50% तक अधिक मज़बूत बनाना पड़ सकता है।
स्टील का उपयोग लगभग दोगुना करना होगा।
सुरक्षित निर्माण के कारण प्रोजेक्ट की लागत 10–20% तक बढ़ सकती है।
नए भूकंप ज़ोनों का संक्षिप्त विवरण
ज़ोन VI: अत्यधिक जोखिम — पूरा हिमालयी क्षेत्र, चंडीगढ़-पंचकूला
ज़ोन V: बहुत अधिक जोखिम — कच्छ, पूर्वोत्तर, पंजाब के प्रमुख शहर (11% भूभाग)
ज़ोन IV: उच्च जोखिम — दिल्ली-NCR सहित (18% भूभाग)
ज़ोन III: मध्यम जोखिम — 30% भूभाग
ज़ोन II: कम जोखिम — 11% भूभाग
नए मानचित्र से साफ है कि पंजाब, हरियाणा और हिमालय से जुड़े मैदानी क्षेत्रों के लिए भूकंप सुरक्षा अब एक बड़ी प्राथमिकता बनने जा रही है।






