पायलट प्रोजेक्ट के तहत सतौज गांव में बिछाया जाएगा 41 किलोमीटर लंबा भूमिगत बिजली नेटवर्क
बिजली तारों से लगने वाली फसलों की आग और हादसों पर लगेगी रोक : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
पंजाब देश का पहला राज्य बनेगा जहां गांव होंगे खंभा-मुक्त : मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान
संगरूर, 19 मई 2026:भगवंत सिंह मान ने मंगलवार को अपने पैतृक गांव सतौज में भूमिगत बिजली तार परियोजना का शिलान्यास कर पंजाब को देश का पहला खंभा-मुक्त गांवों वाला राज्य बनाने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की शुरुआत की। इस परियोजना के तहत किसानों और ग्रामीणों को बिजली की ओवरहेड तारों से होने वाली दुर्घटनाओं, फसलों में आग लगने और बिजली बाधित होने जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत सतौज गांव से 384 बिजली के खंभे हटाए जाएंगे तथा बिना सड़कें खोदे भूमिगत केबलें बिछाई जाएंगी। उन्होंने इसे “रोशन पंजाब” की शुरुआत बताते हुए कहा कि यह परियोजना आधुनिक बुनियादी ढांचे, निर्बाध बिजली आपूर्ति और सुरक्षित गांवों की दिशा में बड़ा कदम है।
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि “सतौज मॉडल” पूरे देश के लिए एक मिसाल बनेगा और आम आदमी पार्टी सरकार ने पंजाब के किसानों को तार-मुक्त गांव देने का अपना वादा पूरा किया है। उन्होंने कहा कि भूमिगत बिजली आपूर्ति से गांवों में बिजली के खंभे लगाने को लेकर होने वाली राजनीति भी समाप्त होगी।
जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सतौज गांव में लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से सभी ओवरहेड बिजली लाइनों को भूमिगत किया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह देश का अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है, जिससे पंजाब पूरे देश के लिए मॉडल राज्य के रूप में उभरेगा।
परियोजना के तकनीकी विवरण साझा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि इसके तहत 7 किलोमीटर हाई टेंशन लाइनें, 9.5 किलोमीटर लो टेंशन लाइनें और करीब 800 घरों को जोड़ने वाली 41 किलोमीटर लंबी सर्विस केबलें भूमिगत बिछाई जाएंगी। 66 केवी ग्रिड सतौज से गांव तक तीन 11 केवी फीडरों के माध्यम से जुड़ा होगा और 28 ट्रांसफॉर्मरों से संबंधित सभी हाई टेंशन लाइनें भूमिगत होंगी। इसके साथ ही ट्रांसफॉर्मरों से मीटर बॉक्स तक की सभी लो टेंशन लाइनें भी भूमिगत की जाएंगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि घरों तक जाने वाली बिजली तारों को भी जमीन के नीचे डाला जाएगा, जिससे 384 बिजली के खंभे हटाए जा सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस परियोजना की विशेषता यह है कि भूमिगत पाइप डालने के लिए ट्रेंचलेस ड्रिलिंग मशीनों का उपयोग किया जाएगा, जिससे सड़कों को खोदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।
ओवरहेड बिजली तारों से होने वाले जोखिमों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली के खंभे और खुली तारें लोगों, बच्चों और पशुओं के लिए खतरा बनती हैं। ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और अन्य कृषि मशीनों के बिजली तारों से टकराने के कारण कई हादसे होते हैं। इसके अलावा फसलों में आग लगने की घटनाओं से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमिगत बिजली प्रणाली से बिजली लीकेज और ट्रांसमिशन नुकसान कम होगा तथा गांवों को निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलेगी। तेज हवाओं और बारिश के दौरान अब बिजली आपूर्ति बाधित नहीं होगी और गांवों की सुंदरता भी बढ़ेगी।
अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान भावुक भी हुए। उन्होंने कहा कि उनके गांव के तीन युवकों की मौत बिजली तारों से जुड़े हादसों में हुई थी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना उन युवाओं को श्रद्धांजलि है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार ने राज्य में डिजिटल क्रांति की शुरुआत की है। आरटीओ सेवाओं को डिजिटाइज किया गया है और आसान रजिस्ट्री प्रणाली लागू की गई है ताकि आम लोगों को दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
उन्होंने सरकार द्वारा बनाए गए बेअदबी विरोधी कानून का जिक्र करते हुए कहा कि पंजाब सरकार ने श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की बेअदबी रोकने के लिए सख्त कानून बनाया है, जिसमें उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान किया गया है।
स्वास्थ्य योजनाओं पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि “मुख्यमंत्री स्वास्थ्य योजना” के तहत पंजाब के 65 लाख परिवारों को स्वास्थ्य कार्ड दिए जा रहे हैं, जिनसे 10 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलेगा। उन्होंने बताया कि अब तक 30 लाख से अधिक लाभार्थियों को स्वास्थ्य कार्ड मिल चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने “मावां धीयां सत्कार योजना” का जिक्र करते हुए कहा कि इसके तहत महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये तथा अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं को 1,500 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। इस योजना का लाभ राज्य की लगभग 97 प्रतिशत महिलाओं को मिलने की संभावना है।
इस अवसर पर हरपाल सिंह चीमा और तरूणप्रीत सिंह सोंड सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।