भूजल संरक्षण के लिए धान की सीधी बुवाई समय की आवश्यकता : डॉ. गर्ग
भवानीगढ़, 2 जून 2026: धान की खेती में पानी बचाने वाली तकनीकों के प्रति किसानों को जागरूक करने के उद्देश्य से पीएयू-फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर द्वारा गांव चन्नो में सीधी बुवाई वाले धान तथा रोपे गए धान में उर्वरकों के संतुलित उपयोग संबंधी किसान जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
शिविर को संबोधित करते हुए वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक (मृदा विज्ञान) एवं प्रभारी, संगरूर डॉ. अशोक कुमार गर्ग ने कहा कि धान की सीधी बुवाई तकनीक भूजल संरक्षण, मजदूरी लागत में कमी तथा धान की खेती की कुल लागत घटाने के लिए एक प्रभावी तकनीक है। उन्होंने बताया कि पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) द्वारा अनुशंसित धान की सीधी बुवाई तकनीक अपनाने से सिंचाई में उपयोग होने वाले पानी की बड़ी मात्रा बचाई जा सकती है तथा वैज्ञानिक सिफारिशों के अनुसार खेती करने पर रोपे गए धान के बराबर उपज प्राप्त की जा सकती है। उन्होंने किसानों से लेजर लेवलिंग, अनुशंसित किस्मों के चयन और खरपतवारों के प्रभावी नियंत्रण पर विशेष ध्यान देने की अपील की।
डॉ. गर्ग ने मिट्टी के नमूने लेने की वैज्ञानिक विधि के बारे में विस्तार से जानकारी दी और मौके पर मिट्टी के नमूने एकत्र करने का व्यावहारिक प्रदर्शन भी किया। उन्होंने किसानों को धान और बासमती की फसल में डीएपी के अनावश्यक उपयोग से बचने तथा यूरिया का संतुलित और वैज्ञानिक ढंग से प्रयोग करने की सलाह दी। उन्होंने विशेष रूप से रोपाई के समय दो से तीन बोरी यूरिया डालने की प्रथा से बचने का आग्रह किया। इसके अलावा किसानों को मिट्टी परीक्षण के आधार पर ही जिंक की अनुशंसित मात्रा का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।
जैविक उर्वरकों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए डॉ. गर्ग ने बताया कि धान की नर्सरी में एजोस्पिरिलम के उपयोग से न केवल फसल की पैदावार बढ़ती है, बल्कि मिट्टी की जैविक गुणवत्ता में भी सुधार होता है। उन्होंने स्वस्थ पौध तैयार करने, उर्वरक प्रबंधन तथा पौधों में बौनेपन की बीमारी की पहचान और रोकथाम संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी भी किसानों के साथ साझा की।
इस अवसर पर कृषि विकास अधिकारी (एडीओ), भवानीगढ़ डॉ. आकाशदीप सिंह ने कृषि एवं किसान कल्याण विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने मक्का की खेती, धान की सीधी बुवाई को अपनाने तथा जिप्सम पर उपलब्ध सब्सिडी के बारे में किसानों को जागरूक किया। साथ ही धान की सीधी बुवाई में खरपतवार नियंत्रण के लिए विभागीय सिफारिशों की भी जानकारी दी।
किसानों को बासमती की प्रमुख किस्मों पूसा बासमती 1509 और पूसा बासमती 1847 में उर्वरक प्रबंधन और बीज उपचार संबंधी वैज्ञानिक सिफारिशों से भी अवगत कराया गया। इस दौरान ग्रामीण युवाओं को पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना द्वारा संचालित विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेकर कृषि एवं सहायक क्षेत्रों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया गया।
शिविर के दौरान प्रगतिशील किसान सरदार बलप्रीत सिंह के खेत में लगभग डेढ़ एकड़ क्षेत्र में की गई धान की सीधी बुवाई का खेत स्तर पर प्रदर्शन भी देखा गया। फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर की टीम ने किसान को बीज दर तथा मशीन की सही सेटिंग संबंधी तकनीकी सलाह भी मौके पर प्रदान की।
कार्यक्रम के अंत में किसानों को एजोस्पिरिलम कल्चर तथा पीएयू का साहित्य वितरित किया गया। किसानों ने विशेषज्ञों के साथ खुलकर चर्चा की और मिट्टी परीक्षण करवाकर मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक प्रबंधन अपनाने में गहरी रुचि दिखाई।