25 जुलाई, 2026 (अनिल कुमार भारती): स्कॉटलैंड के ग्लासगो में शुरू हुई कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत को शुरुआत में ही डोपिंग विवाद का सामना करना पड़ा है। जूडो खिलाड़ी अरुण कुमार को डोपिंग टेस्ट में पॉजिटिव पाए जाने के बाद भारतीय दल से बाहर कर दिया गया और उन्हें वापस भारत भेज दिया गया। उन पर प्रदर्शन बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवा के इस्तेमाल का आरोप लगा है।
अरुण कुमार की कार्रवाई के साथ ही भारतीय वेटलिफ्टर दिलबाग सिंह को भी प्रतियोगिता से हटाकर स्वदेश लौटना पड़ा। हालांकि दिलबाग सिंह खुद डोपिंग मामले में दोषी नहीं पाए गए हैं, लेकिन टीम के अन्य खिलाड़ियों से जुड़े डोपिंग मामलों के कारण उन्हें इसका नुकसान उठाना पड़ा।
विश्व एंटी डोपिंग एजेंसी (वाडा) के नियमों के तहत पिछले एक साल में कई भारतीय वेटलिफ्टर डोपिंग उल्लंघन में फंसे हैं। इसके चलते कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत का वेटलिफ्टिंग कोटा कम कर दिया गया। पहले जहां भारत को 16 खिलाड़ियों की भागीदारी की उम्मीद थी, वहीं अब केवल 11 खिलाड़ियों को ही मौका मिला है। भारतीय अधिकारियों ने 12 खिलाड़ियों को दल में शामिल किया था, लेकिन अंतिम अनुमति सीमित संख्या के लिए ही मिली।
अधिकारियों के अनुसार, दिलबाग सिंह को टीम से बाहर करने का एक कारण उनकी फिटनेस भी रही। पीठ की समस्या के चलते वह बर्मिंघम स्थित भारतीय अभ्यास केंद्र में कई दिनों से नियमित प्रशिक्षण नहीं कर पा रहे थे।
इस बार भारत 191 सदस्यीय दल के साथ कॉमनवेल्थ गेम्स में हिस्सा ले रहा है, जिसमें 126 खिलाड़ी और बाकी सपोर्ट स्टाफ व अधिकारी शामिल हैं। हालांकि इस बार पदकों की उम्मीद पहले की तुलना में कम मानी जा रही है, क्योंकि कुश्ती, हॉकी, क्रिकेट और निशानेबाजी जैसी कई खेल विधाएं प्रतियोगिता का हिस्सा नहीं हैं, जिनमें भारत का प्रदर्शन पारंपरिक रूप से मजबूत रहा है।
डोपिंग मामलों को लेकर भारत की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। वाडा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन बढ़ाने वाली प्रतिबंधित दवाओं के इस्तेमाल के मामलों में भारत का नाम शीर्ष देशों में शामिल है। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ते डोपिंग मामलों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि प्रभावित हो रही है।
भारत में डोपिंग रोकने के लिए नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी (नाडा) और नेशनल डोप टेस्टिंग लेबोरेटरी (एनडीटीएल) जैसी संस्थाएं काम कर रही हैं। खिलाड़ियों के रक्त और मूत्र नमूनों की नियमित जांच की जाती है, लेकिन इसके बावजूद डोपिंग के मामलों में कमी नहीं आना चिंता बढ़ा रहा है।
खेल संगठनों और खिलाड़ियों के बीच जागरूकता और नैतिक जिम्मेदारी बढ़ाना डोपिंग रोकने के लिए जरूरी माना जा रहा है।






