25 जुलाई, 2026 (राजेश कुमार): सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त करने के बाद दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में अपने साथ हुए व्यवहार को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में उन्हें सामान्य मरीज की तरह नहीं, बल्कि एक बंदी की तरह रखा गया। उन्होंने बताया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई नहीं करने का लिखित भरोसा मिलने के बाद ही उन्होंने अपना अनशन समाप्त किया।
वांगचुक के अनुसार, 18 जुलाई को उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उनके आवागमन पर पाबंदी थी। उन्होंने दावा किया कि न तो उन्हें आगंतुकों से मिलने की अनुमति दी गई और न ही मोबाइल फोन या लैपटॉप रखने दिया गया। उन्होंने इस स्थिति की तुलना “उत्तर कोरिया जैसे माहौल” से करते हुए कहा कि उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता सीमित कर दी गई थी।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा मेदांता अस्पताल में स्थानांतरण की अनुमति मिलने के बावजूद उन्हें कई घंटों तक सफदरजंग अस्पताल से बाहर नहीं जाने दिया गया।
मेदांता अस्पताल पहुंचने के बाद केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाकात की। वांगचुक ने बताया कि बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने कथित NEET पेपर लीक प्रकरण के बाद जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही जैसे मुद्दों पर संसद में चर्चा कराने की दिशा में सकारात्मक पहल का भरोसा दिया।
वांगचुक ने कहा कि शुरुआत में उन्हें केवल मौखिक आश्वासन दिया गया था, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि जब तक सरकार अपनी बात लिखित रूप में नहीं देगी, तब तक वे अनशन समाप्त नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि उनका मकसद किसी मंत्री का इस्तीफा मांगना नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकारों और भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन की अन्य मांगों को लेकर आगे भी अभियान जारी रहेगा।






