25 जुलाई, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): जम्मू के 166 मिलिट्री हॉस्पिटल में मेडिकल उपकरणों और दवाओं की खरीद में कथित अनियमितताओं के मामले में सेना की समरी जनरल कोर्ट मार्शल (एसजीसीएम) ने आर्मी मेडिकल कॉर्प्स के सेवानिवृत्त मेजर जनरल देवेंद्र अरोड़ा को दोषी करार दिया है। कोर्ट मार्शल ने उन्हें सेवा से कैशियर (बर्खास्त) करने के साथ एक वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि यह फैसला संबंधित कन्वीनिंग अथॉरिटी की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही प्रभावी होगा।
सूत्रों के अनुसार, उधमपुर में लेफ्टिनेंट जनरल वी. श्रीहरि की अध्यक्षता में चली एसजीसीएम की कार्यवाही पूरी हुई। उत्तरी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ के निर्देश पर इस कोर्ट मार्शल का गठन किया गया था।
मेजर जनरल अरोड़ा के खिलाफ कुल 18 आरोप तय किए गए थे, जिनमें सेना अधिनियम की धारा 52(एफ) के तहत धोखाधड़ी से जुड़े 17 आरोप और धारा 57(ए) के तहत गलत जानकारी देने का एक आरोप शामिल था। सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें 18 में से 16 आरोपों में दोषी पाया।
जांच के दौरान सामने आया कि अगस्त 2018 से जनवरी 2020 के बीच 166 मिलिट्री हॉस्पिटल के कमांडेंट रहते हुए उन्होंने मेडिकल सामग्री, ड्रेसिंग आइटम और अन्य उपकरण जरूरत से अधिक मात्रा में तथा ऊंची कीमतों पर खरीदने की मंजूरी दी। आरोप यह भी है कि खरीद प्रक्रिया के दौरान प्रोप्रायटरी आर्टिकल्स सर्टिफिकेट में मेडिकल स्टोर की उपलब्धता और सप्लायरों से संबंधित भ्रामक जानकारी दी गई, जो डिफेंस प्रोक्योरमेंट मैनुअल-2009 के नियमों के विपरीत थी।
इस मामले की जांच एक गुमनाम शिकायत मिलने के बाद शुरू हुई थी। प्रारंभिक जांच के आधार पर कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी गठित की गई, जिसने सितंबर 2022 में अपनी रिपोर्ट सौंपते हुए अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बाद मेजर जनरल अरोड़ा को आगे की कार्रवाई के लिए 16 कोर मुख्यालय, नगरोटा से संबद्ध किया गया।
मेजर जनरल अरोड़ा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) का दरवाजा खटखटाया था। एएफटी ने निर्देश दिया था कि उसकी अनुमति के बिना कोर्ट मार्शल के निष्कर्ष और सजा लागू नहीं की जाएगी। अब अधिकारी के पास कन्वीनिंग अथॉरिटी के समक्ष फैसले के खिलाफ अपील करने का अधिकार है। यदि वहां से राहत नहीं मिलती, तो वे दोबारा एएफटी में भी चुनौती दे सकते हैं।






