3 अगस्त,2026 (विशाल गुप्ता) कभी पंजाब के हर घर की पहचान रहे मिट्टी के घड़े, चाटियां और अन्य बर्तन अब धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं। हालांकि इस बार भीषण गर्मी के कारण घड़े और मिट्टी के वाटर कूलर की मांग बढ़ी है, लेकिन इस काम से जुड़े कारीगर आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं।
तिलक नगर निवासी कुम्हार अम्मी चंद ने बताया कि पहले हर घर में मिट्टी के बर्तन इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब फ्रिज और आरओ सिस्टम ने उनकी जगह ले ली है। वे आज भी घड़े, चाटियां, फूलदान और सजावटी सामान बनाते हैं। उनका कहना है कि मिट्टी, ईंधन और अन्य सामग्री महंगी होने से लागत बढ़ गई है, जबकि बिक्री पहले जैसी नहीं रही।
कारीगरों ने चिंता जताई कि अगर हालात नहीं बदले तो यह पारंपरिक कला खत्म होने की कगार पर पहुंच सकती है। उनका कहना है कि मिट्टी के बर्तन पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ पानी को प्राकृतिक रूप से ठंडा रखते हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे इस पुरानी कला को बचाने के लिए मिट्टी के बर्तनों का उपयोग बढ़ाएं।






