Wednesday, August 26, 2026
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पी.एयू-फार्म सलाहकार सेवा केंद्र द्वारा गांव संगतपुरा और खोखर कलां में फलदार पौधे लगाने की मुहिम

लहरागागा, 07 अगस्त,2026 (हर्षलीन सिंह): पर्यावरण संरक्षण, टिकाऊ खेती और पोषण सुरक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पीएयू-फार्म सलाहकार सेवा केंद्र (एफ.ए.एस.सी.), संगरूर द्वारा 06 अगस्त 2026 को गांव संगतपुरा और खोखर कलां में फलदार पौधे लगाने और वितरित करने संबंधी विशेष मुहिम चलाई गई। यह मुहिम पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना के निदेशक प्रसार शिक्षा के योग्य मार्गदर्शन में आयोजित की गई।

इस मुहिम के दौरान दोनों गांवों के किसानों को 130 से अधिक फलदार पौधे वितरित किए गए। पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी, लुधियाना से प्राप्त ये पौधे उच्च गुणवत्ता वाली किस्मों जैसे अमरूद (अरका अमूल्या हाइब्रिड), मौसमी, किन्नू, फालसा और करौंदा के थे। इस प्रयास का मुख्य उद्देश्य खेती में विविधता लाना, पोषण सुरक्षा को मजबूत करना और पर्यावरण को हरा-भरा बनाना था।

इस अवसर पर किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. अशोक कुमार गर्ग, वरिष्ठ प्रसार वैज्ञानिक, फार्म सलाहकार सेवा केंद्र, संगरूर ने फलदार वृक्षों के पौष्टिक, औषधीय, पर्यावरणीय और आर्थिक महत्व के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक पेड़ लगाकर ही स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने किसानों को मिट्टी और पानी की संभाल, पराली को आग न लगाने, कृषि रसायनों का संतुलित उपयोग करने और सिंचाई के पानी का उचित प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया।

डॉ. गर्ग ने फलदार बागों की वैज्ञानिक स्थापना और देखभाल संबंधी विस्तृत तकनीकी जानकारी भी साझा की। उन्होंने किसानों को सलाह दी कि पौधे लगाने के लिए समतल, साफ-सुथरी और अच्छी जल निकासी वाली भूमि का चयन किया जाए। उन्होंने 1 मीटर × 1 मीटर × 1 मीटर आकार के गड्ढे खोदने, उनमें ऊपरी मिट्टी और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद को बराबर मात्रा में मिलाकर भरने तथा प्रत्येक गड्ढे में 15 मिलीलीटर क्लोरपाइरीफॉस 20 ई.सी. को लगभग 2 किलोग्राम मिट्टी में मिलाकर डालने की सिफारिश की, ताकि नए पौधों को दीमक के हमले से बचाया जा सके।

इसके अलावा उन्होंने खाद और गोबर की खाद की अनुशंसित मात्रा, सिंचाई प्रबंधन, पोषक तत्वों की कमी, कीड़ों और बीमारियों की समय पर पहचान तथा उनके प्रभावी प्रबंधन के बारे में भी जानकारी दी।

इस मुहिम को दोनों गांवों के प्रगतिशील किसानों का भरपूर सहयोग मिला। गांव खोखर कलां के श्री निर्मल सिंह और श्री जसविंदर सिंह तथा गांव संगतपुरा के श्री सुखतार सिंह, श्री गुरविंदर सिंह और श्री परगट सिंह ने कार्यक्रम की सफलता और फलदार पौधों के उचित वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

फलदार पौधे लगाने की मुहिम के बाद डॉ. गर्ग ने श्री परगट सिंह के सीधी बिजाई वाले धान (डी.एस.आर.) के खेतों और क्षेत्र में लगी पी.आर. 133 सहित अन्य धान की फसलों का दौरा कर निरीक्षण किया।

सर्वेक्षण के दौरान धान में डार्फिंग (बौनापन) बीमारी का कोई प्रकोप नहीं पाया गया। किसानों को पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की सिफारिशों के अनुसार फसलों की देखभाल और प्रबंधन संबंधी समय पर तकनीकी सलाह दी गई, ताकि वे स्वस्थ फसल और अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकें।

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