Sunday, October 11, 2026
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पी.ए.यू.-के.वी.के., संगरूर की ओर से गांव बालद कलां और राजपुरा में पराली प्रबंधन पर पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम

भवानीगढ़, 17 अगस्त,2026 (विशाल गुप्ता): कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की ओर से निदेशक प्रसार शिक्षा, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय, लुधियाना तथा निदेशक, आई.सी.ए.आर.-अटारी, जोन-1, लुधियाना के मार्गदर्शन में किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के विभिन्न तरीकों से अवगत करवाने के लिए गांव बालद कलां और राजपुरा, ब्लॉक भवानीगढ़ में पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में दोनों गांवों के कुल 50 किसानों ने भाग लिया। किसानों को विभिन्न तकनीकों और कृषि मशीनरी के माध्यम से धान की पराली के उचित प्रबंधन की जानकारी दी गई। डॉ. मनदीप सिंह, प्रभारी, पी.ए.यू.-कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने प्रशिक्षण में शामिल किसानों का स्वागत करते हुए वर्तमान परिस्थितियों में फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व तथा धान की पराली जलाने से पर्यावरण और मिट्टी के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले हानिकारक प्रभावों के बारे में जानकारी दी।

उन्होंने जोर देकर कहा कि मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ाने के लिए फसल अवशेषों को खेत में ही मिलाना बेहद जरूरी है। उन्होंने धान की कटाई के बाद गेहूं की बुवाई के विभिन्न तरीकों के आर्थिक पहलुओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि के.वी.के., संगरूर में किसानों के लिए ‘सी.आर.एम. मशीनरी बैंक’ स्थापित किया गया है, जहां से सीमांत और छोटे किसान उचित किराये पर कृषि मशीनरी लेकर अपने खेतों में पराली का उचित प्रबंधन कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर द्वारा किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से विभिन्न विषयों से संबंधित आयोजित किए जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों की जानकारी भी दी।

डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी एवं पावर इंजीनियरिंग) ने किसानों को धान की पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने खेत में धान की पराली के उचित प्रबंधन के लिए विभिन्न कृषि मशीनरी जैसे सुपर एस.एम.एस. युक्त कंबाइन, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, मल्चर, कटर-कम-स्प्रेडर और पलटाव हल आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों के मन में विभिन्न मशीनरी के उपयोग को लेकर मौजूद आशंकाओं और शंकाओं का भी समाधान किया। डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह धालीवाल, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने पराली वाले खेतों में गेहूं की बुवाई की उन्नत खेती विधियों, खरपतवार प्रबंधन और खाद प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।

डॉ. इंद्रजीत सिंह भट्टी, ब्लॉक कृषि अधिकारी, सुनाम ने कृषि विभाग की किसान कल्याण योजनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने सी.आर.एम. मशीनरी खरीदने के लिए उपलब्ध सब्सिडी योजनाओं और ऑनलाइन आवेदन करने की प्रक्रिया के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए इन-सीटू पराली प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. गुरबीर कौर, सहायक प्रोफेसर (पौध संरक्षण) ने पराली में बोई जाने वाली गेहूं की फसल के बीज उपचार, गेहूं में गुलाबी सुंडी की रोकथाम तथा गेहूं की फसल में लगने वाले विभिन्न रोगों और उनके उचित प्रबंधन के बारे में जानकारी दी। डॉ. मुकेश कुमार, पशु चिकित्सा अधिकारी, संगरूर ने धान की पराली को पशुओं के चारे तथा डेयरी में बिछावन सामग्री के रूप में इस्तेमाल करने के बारे में जानकारी साझा की। सभी किसानों को सी.आर.एम. परियोजना के तहत पी.ए.यू. का कृषि साहित्य उपलब्ध करवाया गया। इसके साथ ही सी.आर.एम. मशीनरी की प्रदर्शनी लगाकर इसके उचित उपयोग के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण में शामिल किसानों ने कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की पूरी टीम का धन्यवाद किया और धान की पराली को खेत में ही प्रबंधित करने के प्रति अपनी सहमति जताई।

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