दिड़बा, 22 अगस्त,2026 (विशाल गुप्ता): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की ओर से गांव घनौड़ जट्टां, ब्लॉक दिड़बा के किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के तरीकों से परिचित करवाने के लिए पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें कुल 25 किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षण के दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के विभिन्न तरीकों और कृषि मशीनरी के उपयोग संबंधी विस्तृत जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए डॉ. मनदीप सिंह, इंचार्ज, पीएयू-कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर ने किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने धान की पराली जलाने से पर्यावरण और मिट्टी की सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति भी किसानों को जागरूक किया। उन्होंने कहा कि मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ाने के लिए फसल अवशेषों को खेत में मिलाना बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि केवीके संगरूर में किसानों के लिए “सीआरएम मशीनरी बैंक” स्थापित किया गया है, जहां से सीमांत और छोटे किसान उचित किराये पर कृषि मशीनरी लेकर अपने खेतों में पराली का उचित प्रबंधन कर सकते हैं।
इसके अलावा उन्होंने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की ओर से विभिन्न विषयों पर आयोजित किए जाने वाले व्यावसायिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों और रबी फसलों के उन्नत बीजों की उपलब्धता संबंधी जानकारी भी साझा की।
डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी एवं पावर इंजीनियरिंग) ने किसानों को धान की पराली जलाने के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया। उन्होंने खेत में पराली के उचित प्रबंधन के लिए सुपर एसएमएस युक्त कंबाइन, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, सरफेस सीडर, मल्चर, कटर-कम-स्प्रेडर और पलटाऊ हल जैसी विभिन्न कृषि मशीनरी के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने किसानों की मशीनरी के उपयोग से संबंधित शंकाओं का भी समाधान किया।
डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह धालीवाल, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने पराली वाले खेतों में गेहूं की बुवाई के उन्नत तरीकों, खरपतवार प्रबंधन और खाद प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने किसानों को विभिन्न किसान कल्याण योजनाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने सीआरएम मशीनरी खरीदने के लिए उपलब्ध सब्सिडी योजनाओं और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के बारे में भी बताया। किसानों को मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए इन-सीटू पराली प्रबंधन अपनाने के लिए प्रेरित किया गया।
डॉ. गुरबीर कौर, सहायक प्रोफेसर (पौध संरक्षण) ने पराली में बोई जाने वाली गेहूं की फसल के बीज उपचार, गुलाबी सुंडी की रोकथाम तथा गेहूं की फसल में होने वाली विभिन्न बीमारियों और उनके उचित प्रबंधन के बारे में जानकारी दी।
सभी किसानों को सीआरएम प्रोजेक्ट के तहत पीएयू का कृषि साहित्य उपलब्ध करवाया गया। साथ ही सीआरएम मशीनरी की प्रदर्शनी लगाकर इसके उचित उपयोग संबंधी विस्तृत जानकारी भी साझा की गई। किसानों ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की पूरी टीम का धन्यवाद किया।






