सोलन, 28 अगस्त,2026 (अमनदीप सरां): हिमाचल प्रदेश के बद्दी औद्योगिक क्षेत्र में तेजी से बढ़ते उद्योगों के बीच आसपास के गांवों में जल संकट और प्रदूषण की समस्या गंभीर होती जा रही है। एक नए वाटरशेड अध्ययन में दावा किया गया है कि उद्योगों द्वारा भूजल के अत्यधिक दोहन से क्षेत्र के 21 गांव प्रभावित हो रहे हैं।
अध्ययन के मुताबिक पिछले 15 वर्षों में किसानों के ट्यूबवेल का जलस्तर 8 से 25 मीटर तक नीचे चला गया है। क्षेत्र में हर साल जितना पानी भूजल में पहुंच रहा है, उससे कहीं अधिक पानी निकाला जा रहा है। दसोरा, कोटला और झाड़माजरी जैसे गांवों में कई कृषि बोरवेल सूखने की बात सामने आई है।
रिपोर्ट में औद्योगिक प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई गई है। कोटला चो और बालद नदी के रास्ते भारी धातुओं से युक्त प्रदूषित पानी सरसा नदी में पहुंचने का दावा किया गया है। इसका असर पंजाब की सतलुज नदी और रूपनगर रामसर वेटलैंड तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।
प्रदूषण और घटते भूजल का असर स्थानीय खेती पर भी पड़ा है। क्षेत्र में दालों, तिलहन तथा मक्का-कणक की खेती में भारी कमी आई है और कई ग्रामीण वैकल्पिक आय के लिए जमीन बेचने या पानी के टैंकर के कारोबार की ओर बढ़ रहे हैं।
अध्ययन में प्रदूषित पानी के उपचार के लिए वेटिवर घास आधारित फाइटो-रिमेडिएशन, मिट्टी के बांध और चेक डैम बनाने जैसे उपाय सुझाए गए हैं। वहीं, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने संबंधित राज्यों के प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों से इस मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है।






