हरियाणा, 03 सितंबर,2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा सरकार ने राजस्व अधिकारियों द्वारा दाखिल-खारिज (इंतकाल/म्यूटेशन) के मामलों के निपटारे के लिए सख्त समय-सीमा तय की है। लंबित मामलों को कम करने और दाखिल-खारिज प्रक्रिया में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अब पटवारियों को 5 दिन के भीतर, जबकि कानूनगो और सर्कल रेवेन्यू अधिकारियों को 3-3 दिन के भीतर मामलों का निपटारा करना अनिवार्य होगा। यह निर्णय वित्त आयुक्त (राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग) डॉ. सुमिता मिश्रा की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में लिया गया। बैठक में ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम, म्यूटेशन एवं जमाबंदी के प्रारूप, डिजिटल फसल सर्वेक्षण और नागरिक संचार सेवाओं की समीक्षा की गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि निर्धारित समय-सीमा को स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एस.ओ.पी.) में शामिल किया जाएगा, ताकि पूरे राज्य में दाखिल-खारिज मामलों का समयबद्ध निपटारा सुनिश्चित हो सके। ऑटो-म्यूटेशन के क्रियान्वयन, लंबित मामलों, तकनीकी समस्याओं के समाधान और जमीनी स्तर पर आने वाली दिक्कतों की नियमित निगरानी के लिए एक समर्पित ‘मॉनिटरिंग सेल’ भी गठित किया जाएगा।
डॉ. मिश्रा ने बताया कि लगातार प्रयासों के चलते 5 लाख से अधिक म्यूटेशन मामलों का सफलतापूर्वक निपटारा किया जा चुका है, जिससे प्रदेश में लंबित मामलों में उल्लेखनीय कमी आई है। वेब-एच.ए.एल.आर.आई.एस.से. माइग्रेशन के लिए अभी भी लंबित लगभग 40,000 पुराने (विरासत) म्यूटेशन मामलों पर चर्चा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम का टेस्ट चेक 2 दिन के भीतर पूरा किया जाए। संतोषजनक सत्यापन के बाद सभी लंबित पुराने मामलों को 10 दिन के भीतर नए सिस्टम में माइग्रेट किया जाए और लंबित रिकॉर्ड एवं डेटा की प्राथमिकता के आधार पर समीक्षा कर उन्हें क्लियर किया जाए।
उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी द्वारा 23 जून, 2026 को शुरू किया गया ऑटो-म्यूटेशन सिस्टम संपत्ति पंजीकरण को सीधे म्यूटेशन सेवाओं से जोड़कर इस प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लेकर आया है। इस प्रणाली के तहत संपत्ति का पंजीकरण होते ही म्यूटेशन की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है। इससे अलग से आवेदन करने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और तहसील कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने से भी राहत मिली है।
नागरिक अपने म्यूटेशन की स्थिति ऑनलाइन रीयल टाइम में ट्रैक कर सकते हैं और कहीं से भी, कभी भी म्यूटेशन रिकॉर्ड को एक्सेस, डाउनलोड और प्रिंट कर सकते हैं। तकनीक आधारित और कागज रहित यह प्रणाली भूमि रिकॉर्ड को समय पर अपडेट करने के साथ राजस्व प्रशासन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ा रही है।
विभाग नागरिकों और जमीनी स्तर के कर्मचारियों के लिए म्यूटेशन दस्तावेजों को भी सरल बना रहा है। संशोधित म्यूटेशन प्रिंट फॉर्मेट हिंदी में तैयार किया जाएगा, जिसमें सभी कॉलम के शीर्षक सरल भाषा में होंगे। कॉलम 7 में नकल खेवट नंबर जोड़ा जाएगा और जहां लागू हो, वहां लेन-देन की राशि (कंसीडरेशन अमाउंट) भी दर्ज की जाएगी।
नागरिक केंद्रित पहल के तहत अब आवेदकों को म्यूटेशन प्रक्रिया के हर चरण पर व्हाट्सऐप नोटिफिकेशन मिलेंगे। वहीं विभाग के चैटबॉट ‘भूमित्रा’ का नाम बदलकर ‘एच.आर.वाई.-भूमित्रा’ किया जा रहा है।
जमाबंदी के प्रारूप में भी बदलाव किया जा रहा है, ताकि इसमें हदबस्त नंबर, यू.एल.पी.आई.एन., भूमि सर्वेक्षण नंबर और भू-मालिक का पता शामिल किया जा सके।
इसके अलावा डॉ. मिश्रा ने हरियाणा स्पेस एप्लीकेशन सेंटर को 7 सितंबर तक डिजिटल फसल सर्वेक्षण का डेटा उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं, ताकि ‘मेरी फसल मेरा ब्यौरा’ के डेटा के साथ इसकी विसंगतियों का विश्लेषण किया जा सके।





