Wednesday, September 30, 2026
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सामाजिक अंकेक्षण औपचारिकता नहीं, पारदर्शिता का ब्रह्मास्त्र : डॉ. चौहान

कुरुक्षेत्र, 13 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): सामाजिक अंकेक्षण शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के साथ-साथ ग्रामीणों को विकास योजनाओं की निगरानी में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करता है। योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्र लोगों तक पहुंचे और उनके क्रियान्वयन में किसी प्रकार की कमी न रहे, इसके लिए सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना आवश्यक है। यह बात हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान, नीलोखेड़ी के निदेशक डॉ. वीरेंद्र सिंह चौहान ने कही। वे  बीते 5 दिनों से राज्य के 13 जिलों में चल रहे सामाजिक अंकेक्षण विषयक प्रशिक्षण के समापन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की लोक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इन दिनों राज्य में जारी सामाजिक अंकेक्षण का काम कागजी कार्यवाही बनकर न रहे, प्रशिक्षित ग्राम संसाधन व्यक्ति यह सुनिश्चित करें। उन्होंने सामाजिक अंकेक्षण को पारदर्शिता और जन भागीदारी सुनिश्चित करने वाला अचूक ब्रह्मास्त्र करार दिया।

संस्थान के निदेशक डॉ. चौहान ने कहा कि सामाजिक अंकेक्षण की सफलता तभी संभव है, जब इसमें ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी हो। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के माध्यम से तैयार किए गए गांव के संसाधन व्यक्ति अब अपने-अपने गांवों में जाकर पहले से जारी सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। वे ग्रामीणों से संवाद स्थापित कर योजनाओं से संबंधित जानकारी एकत्र करेंगे तथा लोगों को सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया से जोड़ने का कार्य करेंगे। उन्होंने बताया कि करनाल, कुरुक्षेत्र, झज्जर, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, नूंह, अंबाला, भिवानी, फतेहाबाद, हिसार, सोनीपत, सिरसा और यमुनानगर जिलों में संबंधित जिला परिषदों के परिसर में प्रशिक्षण के कार्यक्रम का संचालन हरियाणा ग्रामीण विकास संस्थान द्वारा किया गया।पांच दिनों के दौरान लगभग 300 गांव संसाधन व्यक्तियों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

निदेशक डॉ. चौहान ने कहा कि जनसुनवाई सामाजिक अंकेक्षण की आत्मा है, क्योंकि इसके माध्यम से ग्रामीणों को अपनी बात सार्वजनिक रूप से रखने और विकास कार्यों से जुड़े तथ्यों को सामने लाने का अवसर मिलता है। उन्होंने प्रशिक्षित प्रतिभागियों से कहा कि वे निष्पक्षता और जिम्मेदारी के साथ अपनी भूमिका निभाएं तथा सामाजिक अंकेक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया न बनाकर इसे ग्रामीणों की भागीदारी और योजनाओं की गुणवत्ता सुधारने का प्रभावी माध्यम बनाएं।

कार्यक्रम के समन्वयक एवं संस्थान के सहायक आचार्य डॉ. वजीर सिंह ने बताया कि प्रशिक्षण के दौरान संस्थान के संसाधन व्यक्तियों एवं सामाजिक अंकेक्षण टीम के खंड संसाधन व्यक्तियों द्वारा गांव संसाधन व्यक्तियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया, ग्रामीण स्तर पर इसके संचालन, अभिलेखों के परीक्षण, ग्रामीणों से संवाद तथा जनसुनवाई सहित विभिन्न व्यवहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद गांव संसाधन व्यक्ति अब अपने-अपने गांवों में जाकर पहले से जारी सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएंगे। उनका उद्देश्य ग्रामीणों की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करते हुए सामाजिक अंकेक्षण की प्रक्रिया को प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बनाना है।

इस अवसर पर संस्थान के अधिकारी, प्रशिक्षण समन्वयक, संसाधन व्यक्ति, सामाजिक अंकेक्षण टीम के खंड संसाधन व्यक्ति तथा विभिन्न जिलों से ऑनलाइन जुड़े प्रतिभागी उपस्थित रहे।

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