पंजाब, 14 सितंबर, 2026 (अनिल कुमार भारती ): पंजाब हरियाणा हाई कोर्ट में दो दो बार केस जीतने के बाद भी राज्य की भगवंत मान सरकार के कानों पर जूं तक भी नहीं रेंग रही है। जबकि पंजाब सरकार की ओर से हाई कोर्ट में एफीडेविट देकर यह वचन दिया गया था कि पंजाब के सभी एडिड स्कूलों में कार्यरत एडिड पोस्टों पर कार्य कर रहे सभी कर्मचारियों और पेंशनरों को सरकारी स्कूलों के सभी कर्मचारियों के साथ ही छठे वेतन आयोग के सभी एरियरों के बकाये अदा किए जाएंगे। हालांकि हाई कोर्ट के आदेशों के पश्चात् पिछले वर्ष कुछ बकायों का भुगतान करना शुरू भी कर दिया गया था। परंतु अप्रैल 2026 और जून 2026 से अदा किए जाने वाले बकायों का भुगतान हालांकि सरकारी स्कूलों के लगभग पेंशनरों और सेवारत कर्मचारियों को तो देना प्रारंभ किया जा चुका है परंतु हाई कोर्ट में दिया अपना वायदा पूरा ना करते हुए राज्य सरकार सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कार्यरत सभी 1400 अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों और 12000 के लगभग पेंशनरों को छठे पे कमीशन के एरियरों के भुगतान करने पर छ: महीने बीत जाने के बावजूद भी रहस्यमयी चुप्पी धारण किए बैठी है।
पंजाब के 512 से घटकर मात्र 425 रह गए हैं एडिड स्कूल:
एडिड स्कूलों के कर्मचारियों के अनुसार प्रदेश में सन 1967 में 512 एडिड स्कूल थे। सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बाद नई नियुक्तियां नहीं होने से करीब 87 स्कूल बंद हो गए और अब इनकी संख्या 425 रह गई है। इन स्कूलों में कभी लगभग 9468 पद स्वीकृत थे, लेकिन वर्ष 2003 के बाद नई भर्ती नहीं होने से अधिकांश पद खाली होते चले गए।
प्रदेश के एडिड स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों के लिए नौकरी अब आर्थिक ही नहीं बल्कि अपने अस्तित्व के संकट का कारण भी बनती जा रही है। करीब नौ महीने से वेतन नहीं मिलने से 425 एडिड स्कूलों में तैनात लगभग 1400 शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी गंभीर परेशानी से गुजर रहे हैं। हालात यह हैं कि रोजमर्रा के घरेलू खर्च से लेकर बच्चों की फीस और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए कर्मचारियों को या तो गहने बेचने पड़ रहे हैं या गिरवी रखने पड़ रहे हैं अथवा रिश्तेदारों, परिचितों से उधार मिलना जब बंद हो जाता है तो अपने घर मकान की रजिस्ट्रियां गिरवी रख कर महंगी दरों से ब्याज़ पर कर्ज़ ले कर गुज़ारा करना पड़ रहा है। जिन लोगों ने बैंकों से कर्ज़ ले कर घर बनाए हैं उनको किश्तें अदा ना कर पाने पर बैंकों से नोटिस मिल रहे हैं। वे अपनी पूरी ईमानदारी से नौकरी करते हुए भी कर्ज के बोझ तले दबते ही चले जा रहे हैं।
कर्मचारियों यूनियन के नेताओं का यह भी कहना है कि लंबे समय से वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण सभी के परिवार का बजट बिगड़ गया है। कई कर्मचारी ऐसे हैं जिनके सामने अब घर का राशन, बच्चों के लिए दूध, उनकी पढ़ाई और अन्य जरूरी खर्च चलाना मुश्किल ही नहीं असंभव सा होता जा रहा है। यूनियन ने सरकार को चेतावनी भी दी है कि यदि जल्द वेतन जारी नहीं किया गया और छठे पे कमीशन के बकायों का भुगतान अपने हाई कोर्ट में दिए गए एफीडेविट के अनुसार तुरंत जारी करना शुरू ना किया गया तो उन्हें मजबूरी में आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ जाएगा।
यहां यह भी वर्णनीय है कि इन स्कूलों में खाली पड़े हज़ारों पदों को भरने के लिए राज्य सरकार द्वारा इन स्कूलों की सभी मैनेजमेंटस को यह ऑफर की गई है कि इन स्कूलों में एडिड पोस्टों पर न्याय नियुक्त होने वाले कर्मचारियों के वेतन में सरकार 70 हिस्सा देगी और मैनेजमेंट को 30 प्रतिशत हिस्सा देना होगा। सरकार इस न्यू ऑफर के अनुसार पद भरने को तैयार है, परन्तु इस मामले में प्रबंधन समितियों ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं क्योंकि पहले की व्यवस्था के अनुसार सरकारी 95 प्रतिशत और मैनेजमेंटस के 5 प्रतिशत की रेशो में से 5 प्रतिशत भाग अदा करना भी सभी मैनेजमेंटस के लिए मुश्किल हो रहा है तो आर्थिक तंगी और बदहाली का शिकार ये मैनेजमेंटस 30 प्रतिशत का भारी भरकम हिस्सा कहां से अदा कर पाएंगी ?
वेतन भुगतान व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों का कहना है कि एडिड स्कूलों के स्टाफ के वेतन में सरकार की जो 70 प्रतिशत हिस्सेदारी बात की जा रही है और 30 प्रतिशत राशि स्कूल मैनेजमेंट को वहन करने की बात राज्य सरकार द्वारा कही जा रही है, वह भी स्वीकार करने योग्य नहीं है क्योंकि अधिकांश स्कूलों की अपनी आय का कोई पर्याप्त स्रोत ही नहीं है। ऐसे में मैनेजमेंट अपना हिस्सा देने की स्थिति में हैं ही नहीं।
पिछले साढ़े चार साल से मांगें लंबित पड़ी हैं, समाधान कोई निकल नहीं रहा। राज्य सरकार आंखें बंद किए सोने की एक्टिंग कर रही है।
यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरमीत सिंह मदनीपुर, महासचिव शरणजीत सिंह कादीमाजरा और पेंशनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष गुरचरण सिंह चाहल ने कहा कि एडिड स्कूलों के शिक्षक एवं कर्मचारी लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष करते चले आ रहे हैं। पिछले साढ़े चार वर्षों में शिक्षा विभाग और सरकार की ओर से समस्याओं का समाधान नहीं किया गया है केवल झूठे वायदे ही लगातार किए जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि पिछले सभी महीनों के वेतन तुरंत जारी किए जाएं, सेवानिवृत्त कर्मचारियों के पीपीओ जारी हों, छठे वेतन आयोग के बकाया एरियर के मामले में राज्य सरकार हाई कोर्ट में दिए गए अपने एफीडेविट में दिए गए वचन को तुरंत निभाये और सरकारी कर्मचारियों की तरह ही उनके साथ साथ एरियरों का भुगतान तुरंत कर दिया जाए और अन्य लंबित मांगों का भी तत्काल निपटारा किया जाए।
यूनियन नेताओं ने मुख्यमंत्री पंजाब सरदार भगवंत मान से यह भी मांग की कि उन्होंने अपनी पार्टी के चुनावी घोषणा पत्र में यह वचन दिया था कि वे उनकी सरकार बनने पर एडिड स्कूलों के सभी अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों में कार्यरत सभी अध्यापकों और अन्य कर्मचारियों के समान सभी प्रकार की सुविधाएं प्रदान करेंगे। अब तो सरकार बने हुए साढ़े चार साल से भी ऊपर वक्त गुज़र चुका है, सरकार अपना किया हुआ वचन निभाए और एडिड स्कूल कर्मचारियों को सरकारी स्कूलों में मर्जर कर दे, इससे प्रदेश की आप सरकार द्वारा चुनाव घोषणा पत्र में किया गया वायदा भी पूरा हो जायेगा और प्रदेश के सभी एडिड स्कूलों की सभी समस्याओं का अंत भी हो जाएगा।






