Monday, September 28, 2026
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मंडियों में धान को सुखाकर लाएं तो किसानों को नहीं होगी कोई दिक्कत-परेशानी : श्याम सिंह राणा

कुरुक्षेत्र, 14 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा):  हरियाणा के कृषि एवं किसान विभाग मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि धान के सीजन में किसान अपनी फसल को सुखाकर लाने तो उन्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत परेशानी नहीं होगी। धान की फसल में निर्धारित मात्रा 17 प्रतिशत नमी का खरीद किया जाता है। सरकार पूरी तरह से किसान और आढ़तियों के साथ खड़ी है। सरकार, किसान और व्यापारी एक ही परिवार के सदस्य हैं। कृषि मंत्री ने किसानों से अपील करते हुए कहा कि गेहूं व धान की खेती के साथ-साथ दलहन की खेती करने की अपील की।

हरियाणा के कृषि एवं किसान विभाग मंत्री श्याम सिंह राणा सोमवार को सेक्टर-8 स्थित कार्यालय में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान चेयरमैन गुरनाम सैनी, जिला अध्यक्ष रमेश सैनी भी मौजूद रहे।

 कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि गेहूं की फसल को सरकार खरीदती है और धान की फसल को राइस मिलों से चावल बनवाकर लिया जाता है। फसल खरीद का कार्य केंद्र सरकार और मैनेजमेंट का कार्य प्रदेश सरकार द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि पहले के समय में किसान धान की फसल को हाथ से कटवाते थे, इस प्रक्रिया में करीब 20 दिन से एक महीने बाद ही फसल मंडियों में आती थी। अब कंबाइन से कटाई और आधे घंटे बाद मंडी में फसल पहुंच जाती है। ऐसे में धान की फसल में नमी की मात्रा ज्यादा होती है।

 उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा राइस मिल से प्रति क्विंटल 67 किलोग्राम चावल लिया जाता है। यदि धान में नमी ज्यादा होगी तो सूखने के बाद चावल की प्रति क्विंटल 67 किलोग्राम में घटौती होगी। उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के लक्ष्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 प्रतिशत योगदान कृषि क्षेत्र का रखा है। यह लक्ष्य तभी पूरा होगा जब किसान सभी फसलों को अपने ही देश में पैदा करेंगे और देश को विदेशों से किसी भी खाद्य सामग्री का आयात न करना पड़े।

कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि कृषि क्षेत्र में भी ऐतिहासिक बदलाव हुए हैं। कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई, प्राकृतिक खेती और आधुनिक तकनीक के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी बनाने का प्रयास किया गया है। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 6 हजार रुपये की वार्षिक सहायता सीधे उनके बैंक खातों में दी जा रही है। अब तक 4 लाख 50 हजार करोड़ रुपये की किसान सम्मान निधि दी जा चुकी है। पीएम फसल बीमा योजना के तहत 4 करोड़ 20 लाख किसानों को लाभ मिला है। ई-नाम  प्लेटफॉर्म पर 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की फसल बिक्री हुई है, जिससे 1 हजार 656 मंडियां और 1 करोड़ 80 लाख से अधिक किसान सीधे जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि देश के लगभग 8 करोड़ किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से आसान और विश्वसनीय लोन की सुविधा मिल रही है। श्रीअन्न को वैश्विक पहचान मिलने से भारत पहली बार कृषि निर्यात में दुनिया के टॉप-10 देशों में शामिल हुआ है। पीएम मत्स्य संपदा योजना से देश में मछली उत्पादन वर्ष 2014-15 के 95 लाख टन से दोगुना होकर अब लगभग 2 करोड़ टन तक पहुंच गया है।

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