दिढ़बा, 16 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब सरकार द्वारा युवाओं और किसानों को पारंपरिक रोजगार के साथ-साथ लाभदायक सहायक व्यवसायों से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के प्रयासों के तहत, एसडीएम कार्यालय दिढ़बा के मीटिंग हॉल में बकरी पालन प्रशिक्षण शिविर के दूसरे चरण के अंतर्गत 45 प्रशिक्षार्थियों को तीन दिवसीय विशेष प्रशिक्षण देने की शुरुआत की गई।
इस संबंध में जानकारी देते हुए उप मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) दिढ़बा, श्री तरसेम चंद ने बताया कि कैबिनेट मंत्री स. हरपाल सिंह चीमा के दिशा-निर्देशों और डिप्टी कमिश्नर श्रीमती पूनमदीप कौर की अगुवाई में सब-डिवीजन के युवाओं और किसानों को उनके घरों के पास ही स्व-रोजगार के अधिक से अधिक अवसर मुहैया करवाने के लिए प्रशासन द्वारा विभिन्न विभागों के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि बकरी पालन प्रशिक्षण के पहले चरण के दौरान 53 प्रशिक्षार्थियों को प्रशिक्षण दिया गया था और इसकी सफलता तथा लोगों से मिली भरपूर प्रतिक्रिया को देखते हुए दूसरे चरण के तहत 45 अन्य प्रशिक्षार्थियों को तीन दिवसीय प्रशिक्षण देने की शुरुआत की गई है।
श्री तरसेम चंद ने कहा कि पंजाब के युवाओं में मेहनत, हुनर और आगे बढ़ने की अपार क्षमता है। यदि उन्हें सही प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और वित्तीय सहायता मिले, तो वे अपने राज्य में रहकर ही सफल उद्यमी बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि आज कई परिवार अपने बच्चों को विदेश भेजने के लिए 20 से 25 लाख रुपये तक खर्च करते हैं। यदि इस राशि का एक हिस्सा भी बच्चों के कौशल और स्व-रोजगार पर लगाया जाए, तो वे 5 से 10 लाख रुपये की लागत से बकरी पालन, डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, मछली पालन या अन्य सहायक व्यवसाय शुरू करके अपने पैरों पर खड़े हो सकते हैं।
उन्होंने प्रशिक्षार्थियों को सलाह दी कि किसी भी सहायक व्यवसाय की शुरुआत छोटे स्तर से की जानी चाहिए और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के बाद धीरे-धीरे व्यवसाय का विस्तार करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल प्रशिक्षण देना ही प्रशासन का मकसद नहीं है, बल्कि प्रशिक्षण लेने वाले योग्य उम्मीदवारों को स्व-रोजगार स्थापित करने तक आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करना भी इस पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
एसडीएम ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले जो उम्मीदवार बैंकों और संबंधित योजनाओं की निर्धारित शर्तों को पूरा करेंगे, उनके ऋण मामलों (लोन केस) को आगे बढ़ाने के लिए प्रशासन द्वारा हर संभव सहयोग दिया जाएगा। एससी और बीसी वर्ग से संबंधित योग्य लाभार्थियों के मामले संबंधित निगमों के माध्यम से बैंकों को भेजने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि लीड बैंक मैनेजर (एलडीएम) और संबंधित संस्थानों के साथ तालमेल करके मामलों का निरंतर फॉलो-अप किया जाएगा ताकि योग्य लाभार्थियों को वित्तीय सहायता प्राप्त करने में अनावश्यक देरी न हो।
एसडीएम ने बकरी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए ‘चलती-फिरती एटीएम’ करार देते हुए कहा कि जरूरत पड़ने पर पशुपालक इसे बेचकर तुरंत नकदी प्राप्त कर सकता है, जबकि दूध, मीट और नस्ल सुधार सहित विभिन्न तरीकों से भी आय प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सहायक व्यवसाय न केवल किसानों की आय के स्रोतों में विविधता लाते हैं, बल्कि ग्रामीण युवाओं के लिए अपने घर और परिवार में रहकर सम्मानजनक रोजगार हासिल करने का भी एक बेहतरीन साधन बन सकते हैं। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे कुशल बनकर सरकारी प्रशिक्षण और स्व-रोजगार योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और पंजाब में रहकर अपनी मेहनत से खुशहाल भविष्य की नींव रखें।
वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी (सीनियर वेटरनरी ऑफिसर) दिढ़बा, डॉ. शिविंदरपाल ने बताया कि तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान पशुपालन विभाग के विषय विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षार्थियों को बकरी पालन के विभिन्न वैज्ञानिक और व्यावहारिक पहलुओं की जानकारी दी गई। डॉ. सुखविंदर सिंह और उनकी टीम द्वारा प्रशिक्षार्थियों को बकरी पालन को एक योजनाबद्ध और लाभदायक व्यवसाय के रूप में विकसित करने के संबंध में मार्गदर्शन दिया गया।
बकरी पालन विशेषज्ञ डॉ. जतिंदरपाल सिंह द्वारा प्रशिक्षार्थियों को व्यावसायिक स्तर पर लाभदायक बकरियों की उत्तम नस्लों, उनकी पहचान, उपयुक्त नस्ल के चयन और नस्ल सुधार से संबंधित तकनीकी बातें समझाई गईं। इसी तरह, वेटरनरी अस्पताल महलां से पशु आहार विशेषज्ञ डॉ. अनुरीत द्वारा बकरियों के संतुलित आहार, फीड प्रबंधन, विभिन्न आयु के पशुओं की खुराक संबंधी जरूरतों और नवजात मेमनों की देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
डॉ. शिविंदरपाल ने कहा कि बकरी पालन कम और मध्यम पूंजी से शुरू किया जा सकने वाला एक लाभदायक सहायक व्यवसाय है। इस व्यवसाय को वैज्ञानिक तरीके से अपनाकर किसान और युवा दूध, मीट, नस्ल सुधार और अन्य उत्पादों के माध्यम से अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि बकरियों की अच्छी नस्ल का चयन, संतुलित आहार, समय पर टीकाकरण, बीमारियों से बचाव और साफ-सुथरा आवास इस व्यवसाय की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
डॉ. शिविंदरपाल ने बताया कि प्रशिक्षार्थियों को केंद्र सरकार के नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (एनएलएम) सहित पशुपालन से संबंधित विभिन्न सरकारी योजनाओं, वित्तीय सहायता और योग्य परियोजनाओं के लिए उपलब्ध सब्सिडी के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि योजना के नियमों और प्रोजेक्ट की श्रेणी के अनुसार योग्य लाभार्थियों को सब्सिडी का लाभ मिल सकता है। उम्मीदवारों को प्रोजेक्ट रिपोर्ट, आवश्यक दस्तावेजों और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के संबंध में भी मार्गदर्शन दिया गया।
इस अवसर पर सब-डिवीजन दिढ़बा के निवासियों से अपील की गई कि जो व्यक्ति बकरी पालन के अलावा भेड़ पालन, डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, सूअर पालन, मछली पालन या मशरूम की खेती आदि सहायक व्यवसायों का प्रशिक्षण प्राप्त करना चाहते हैं, वे एसडीएम कार्यालय दिढ़बा में अपना आवेदन जमा कर सकते हैं। प्राप्त आवेदनों के आधार पर संबंधित विभागों से तालमेल करके प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किए जाएंगे।
भेड़ और बकरी पालन का प्रशिक्षण दिढ़बा में ही आयोजित करने को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण के लिए दूर न जाना पड़े, जबकि आवश्यकतानुसार अन्य सहायक व्यवसायों के प्रशिक्षण के लिए संगरूर में संबंधित विभागों से तालमेल किया जाएगा। जो इच्छुक उम्मीदवार वर्तमान बैच में शामिल नहीं हो सके, उन्हें अगले प्रशिक्षण बैचों में अवसर देने का प्रयास भी किया जाएगा।






