बटाला, 18 सितंबर, 2026 (शहीद-ए-आज़म ब्यूरो): श्री गुरु नानक देव जी के 539वें विवाह पर्व को समर्पित आज बटाला शहर गुरबाणी, कीर्तन और जयकारों से गूंज उठा। देश-विदेश से बड़ी संख्या में पहुंची संगत ने गुरुद्वारा श्री डेहरा साहिब और गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में नतमस्तक होकर श्रद्धा प्रकट की। सुबह गुरुद्वारा श्री डेहरा साहिब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्र-छाया और पंज प्यारों की अगुवाई में अरदास के बाद महान नगर कीर्तन रवाना हुआ। गुरुद्वारा डेहरा साहिब वह ऐतिहासिक स्थान है जहां माता सुलखनी जी के साथ श्री गुरु नानक देव जी के आनंद कारज (विवाह) हुए थे। नगर कीर्तन बटाला के विभिन्न बाजारों से होता हुआ शाम के समय गुरुद्वारा श्री कंध साहिब में संपन्न होने का कार्यक्रम है।
नगर कीर्तन के दौरान पंजाब पुलिस बैंड, गतका पार्टियों और धार्मिक जत्थों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। शहर निवासियों द्वारा जगह-जगह संगत के स्वागत के लिए लंगर और छबीलें लगाई गईं। प्रबंधकों के अनुसार बड़ी संख्या में संगत के आगमन को ध्यान में रखते हुए प्रशासन द्वारा आवश्यक प्रबंध किए गए हैं। इस बार विवाह पर्व से जुड़े बारात-रूपी नगर कीर्तन में भी बदलाव किया गया। एसजीपीसी (SGPC) के अनुसार सुल्तानपुर लोधी से 16 सितंबर को रवाना हुआ नगर कीर्तन 17 सितंबर की शाम बटाला पहुंचा, यानी इस बार यात्रा को दो दिनों का रूप दिया गया।
एसजीपीसी और सरकारी जानकारी के मुताबिक बटाला में श्री गुरु नानक देव जी के विवाह का ऐतिहासिक संबंध 1487 ईस्वी से जोड़ा जाता है। गुरुद्वारा कंध साहिब उस स्थान की यादगार है जहां विवाह के समय बारात का ठहराव हुआ बताया जाता है, जबकि गुरुद्वारा डेहरा साहिब विवाह समारोह से जुड़ा प्रमुख स्थान है। विवाह पर्व के अवसर पर धार्मिक समारोह, कीर्तन, अमृत संचार और अन्य गुरमत कार्य भी करवाए जा रहे हैं। यह वार्षिक समारोह बटाला की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और हर साल बड़ी संख्या में संगत यहां पहुंचती है। समारोहों के दौरान संगत को श्री गुरु नानक देव जी के ‘नाम जपो, किरत करो और वंड छको’ के जीवन-संदेश से जुड़ने का आह्वान किया गया तथा विवाह पर्व को श्रद्धा, सेवा और गुरमत मर्यादा के साथ मनाने पर जोर दिया गया।






