भिवानी, 18 सितंबर, 2026 (शहीद-ए-आज़म ब्यूरो): हरियाणा के भिवानी में विजिलेंस/एंटी करप्शन ब्यूरो ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए फील्ड कानूनगो अशोक कुमार को कथित तौर पर 10,000 रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई एक शिकायत के आधार पर ट्रैप (जाल) बिछाकर की गई और रिश्वत की रकम भी बरामद कर ली गई। जानकारी के अनुसार मामला ‘स्वामित्व योजना’ के तहत पंचायती जमीन पर लंबे समय से कब्जे से जुड़ा था। शिकायतकर्ता के परिचित ने मालिकाना हक के लिए आवेदन दिया था, जिसके संबंध में जमीन की पैमाइश करके रिपोर्ट तैयार कर आगे भेजी जानी थी। आरोप है कि कानूनगो ने यह रिपोर्ट भेजने के बदले 10 हजार रुपये की मांग की।
शिकायत मिलने के बाद विजिलेंस ने मामले का सत्यापन किया और कथित रिश्वत की मांग की पुष्टि होने के बाद ट्रैप की योजना बनाई। निर्धारित प्रक्रिया के तहत जैसे ही शिकायतकर्ता ने रकम अशोक कुमार को दी, टीम ने उसे काबू कर लिया। एक रिपोर्ट के मुताबिक शिकायतकर्ता के पास कथित रिश्वत मांगने की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी थी। रिपोर्टों में अशोक कुमार को जाटू लुहारी का निवासी बताया गया है। विजिलेंस द्वारा उसके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट) के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
कानून क्या कहता है?: प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 7 के तहत सरकारी कर्मचारी द्वारा सरकारी ड्यूटी को गलत या बेईमानी से प्रभावित करने के लिए अनुचित लाभ मांगना या लेना अपराध है। वर्तमान कानून के अनुसार इस धारा के तहत 3 से 7 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। विजिलेंस अधिकारियों के अनुसार जांच के दौरान मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों की भी जांच की जा रही है। गिरफ्तारी या एफआईआर अपने आप में दोष साबित नहीं करती; अंतिम दोष साबित होने की प्रक्रिया अदालती कार्रवाई के बाद ही होगी। इस कार्रवाई से राजस्व विभाग में हड़कंप मच गया है और विजिलेंस ने लोगों से अपील की है कि किसी सरकारी काम के बदले रिश्वत मांगे जाने पर तुरंत एंटी-करप्शन अधिकारियों को सूचित करें।






