चंडीगढ़, 18 सितंबर 2026, (गुरमीत सिंह तुंग): पंजाब सरकार ने 16 सितंबर 2026 को जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) एक्ट-2026 से जुड़े मामलों पर श्री अकाल तख्त साहिब द्वारा बनाई गई कमेटी के साथ तालमेल के लिए 7 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। इसका उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच विचार-विमर्श करके सरकार को कानूनी और रणनीतिक सुझाव देना है।
7 सदस्यीय कमेटी में कौन शामिल हैं? कमेटी में ज्ञानी रघबीर सिंह, संत ज्ञानी हरनाम सिंह खालसा, संत बाबा सेवा सिंह रामपुर खेड़ा, सेवानिवृत्त जस्टिस जसपाल सिंह, सेवानिवृत्त जस्टिस गुरबीर सिंह, पूर्व आईपीएस (IPS) अधिकारी जतिंदर सिंह औलख और लॉ ऑफिसर प्रीतइंदर पाल सिंह शामिल हैं। कमेटी की संरचना में धार्मिक, न्यायिक, प्रशासनिक और कानूनी पृष्ठभूमि वाली शख्सियतों को शामिल किया गया है।
विवाद की पृष्ठभूमि पंजाब विधानसभा ने 13 अप्रैल 2026 को सत्कार कानून में संशोधन सर्वसम्मति से पारित किया था और यह 20 अप्रैल को गजट में प्रकाशित हुआ। संशोधन में श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की सुरक्षा, रिकॉर्ड, आपूर्ति और कस्टोडियन की जिम्मेदारियों से संबंधित नए प्रावधान किए गए। कानून में सेंट्रल रजिस्टर, प्रत्येक स्वरूप के लिए यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर और कस्टोडियन से संबंधित रिकॉर्ड का प्रावधान किया गया है। बेअदबी सहित कुछ गंभीर अपराधों की श्रेणी के तहत सख्त सजाओं, जुर्माने और गैर-जमानती (non-bailable) तथा गैर-समझौतायोग्य (non-compoundable) अपराधों का प्रावधान भी शामिल है।
अकाल तख्त साहिब की मुख्य आपत्तियां श्री अकाल तख्त साहिब की ओर से कानून की कुछ धाराओं पर आपत्तियां जताई गईं। विशेष रूप से “कस्टोडियन” की परिभाषा, सेंट्रल रजिस्टर और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों के प्रबंधन में सरकारी हस्तक्षेप से जुड़े सवाल सामने आए। अकाल तख्त साहिब द्वारा गठित विशेषज्ञ कमेटी ने कानून की 5 धाराओं में कम से कम 10 बदलावों की मांग की थी। इसमें कस्टोडियन से संबंधित प्रावधान को हटाने का मुद्दा भी शामिल बताया गया।
29 जून की सुनवाई 29 जून 2026 को सिख मंत्रियों और विधायकों को अकाल तख्त साहिब में स्पष्टीकरण के लिए बुलाया गया। इसके बाद सरकार को आपत्तियों पर कार्रवाई के लिए समय दिया गया। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने जुलाई में कहा था कि सरकार अकाल तख्त द्वारा दिए गए सुझावों पर एसजीपीसी (SGPC) के साथ विचार कर रही है और मामला एडवोकेट जनरल के पास कानूनी राय के लिए भेजा गया है।
29 जुलाई का सरकारी जवाब सरकार की ओर से 29 जुलाई को अकाल तख्त को लिखित जवाब सौंपा गया। यह जवाब अमृतसर ईस्ट के विधायक डॉ. इंद्रबीर सिंह निज्जर और अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर दलविंदरजीत सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया। इसके बाद अकाल तख्त की 5 सदस्यीय विशेषज्ञ कमेटी ने 7 अगस्त को कहा कि सरकार के जवाब में मुख्य आपत्तियों पर और स्पष्टता की आवश्यकता है और अनुपालन रिपोर्ट (compliance report) मांगी गई।
अकाल तख्त साहिब की कमेटी इस 5 सदस्यीय कमेटी में सेवानिवृत्त जस्टिस रूपिंदर सिंह सोढ़ी, सेवानिवृत्त जस्टिस महिंदर मोहन सिंह बेदी, वरिष्ठ अधिवक्ता पूरन सिंह हुंदल, सिख विद्वान डॉ. केहर सिंह और प्रो. जगमोहन सिंह शामिल हैं। अब सरकार की 7 सदस्यीय कमेटी और अकाल तख्त की 5 सदस्यीय कमेटी के बीच तालमेल और विचार-विमर्श का औपचारिक मार्ग प्रशस्त हो गया है।
ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज का पक्ष 17 सितंबर को अकाल तख्त के कार्यकारी जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गढ़गज्ज ने सरकार द्वारा कमेटी बनाने का स्वागत किया, लेकिन इसे देर से उठाया गया कदम बताया। उनका पक्ष था कि जब तक मामला हल नहीं हो जाता, कानून को लागू करने पर रोक लगाई जाए और अकाल तख्त द्वारा दिए गए सुझावों पर कार्रवाई की जाए।
अन्य विद्वानों का पक्ष कुछ सिख विद्वानों और कानूनी विशेषज्ञों ने भी कानून में राज्य की भूमिका, पंथिक संस्थाओं के अधिकार और श्री गुरु ग्रंथ साहिब के प्रबंधन से संबंधित सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, कानून का मुख्य उद्देश्य श्री गुरु ग्रंथ साहिब के स्वरूपों की सुरक्षा और बेअदबी के मामलों में कानूनी जवाबदेही तय करना बताया गया है।
आगे की प्रक्रिया अब मुख्य ध्यान कस्टोडियन की परिभाषा, सेंट्रल रजिस्टर, एसजीपीसी (SGPC) की भूमिका, सरकारी अधिकार और बेअदबी से संबंधित सजाओं पर केंद्रित होने की संभावना है। यदि कानून की धाराओं में संशोधन की आवश्यकता मानी जाती है, तो उसके लिए आवश्यक विधायी प्रक्रिया अपनानी होगी।
पूरे मामले के तीन मुख्य पहलू हैं—धार्मिक मर्यादा, कानूनी अधिकार और प्रशासनिक जवाबदेही। 16 सितंबर को गठित 7 सदस्यीय समन्वय कमेटी इन तीनों पहलुओं के बीच सरकार और अकाल तख्त साहिब की विशेषज्ञ कमेटी के बीच औपचारिक विचार-विमर्श का एक मंच है। इस कमेटी की आगामी कार्रवाई और सिफारिशें यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगी कि 2026 के सत्कार कानून में किन बदलावों की आवश्यकता है।






