कपूरथला, 18 सितंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): धान की कटाई के आने वाले सीजन के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कपूरथला जिला प्रशासन ने एक व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। डिप्टी कमिश्नर आकाश बंसल के अनुसार, इस योजना का मुख्य केंद्र वैज्ञानिक फसल अवशेष प्रबंधन, ग्राम स्तरीय निगरानी और किसानों को लगातार जागरूक करना है।
प्रशासन द्वारा 364 नोडल अधिकारी और 135 क्लस्टर अधिकारी, यानी कुल 499 अधिकारी, गांवों और क्लस्टरों की निगरानी के लिए तैनात किए जाएंगे। ये अधिकारी किसानों के संपर्क में रहेंगे, संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करेंगे और पराली जलाने की संभावना वाले मामलों में समय पर हस्तक्षेप करेंगे।
7.5 लाख टन पराली का प्रबंधन: प्रशासन के अनुमान के अनुसार, इस सीजन के दौरान जिले में लगभग 7.5 लाख मीट्रिक टन धान की पराली पैदा होने की उम्मीद है। इसमें से लगभग 2.70 लाख मीट्रिक टन इन-सिटू (खेत के अंदर) तरीकों से और 4.80 लाख मीट्रिक टन एक्स-सिटू (खेत के बाहर) तरीकों से संभालने की योजना है। बाकी अवशेषों को ईंट-भट्टों, बॉयलर और अन्य उत्पादक उपयोगों के लिए भेजने का लक्ष्य रखा गया है।
किसानों के लिए कस्टम हायरिंग सेंटरों, सहकारी समितियों और किसान समूहों के माध्यम से लगभग 4,000 फसल अवशेष प्रबंधन मशीनें उपलब्ध बताई गई हैं। इनमें बेलर, रैक, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर, जीरो ड्रिल, मल्चर, स्ट्रॉ चॉपर और अन्य मशीनरी शामिल हैं।
पराली जलाने के पर्यावरण पर प्रभाव पर भी जोर: डीसी आकाश बंसल ने कहा कि पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ-साथ मिट्टी के आवश्यक पोषक तत्व और लाभदायक जीव-जंतु प्रभावित होते हैं। वैज्ञानिक अवशेष प्रबंधन से पराली को कचरा समझने के बजाय एक कृषि संसाधन के रूप में उपयोग करने की संभावना बनती है।
प्रशासन ने कृषि विभाग, स्थानीय निकायों, फील्ड अधिकारियों और अन्य हितधारकों के साथ तालमेल बिठाकर अभियान चलाने और किसानों को मशीनरी तथा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने पर जोर दिया है। सहायता के लिए जिला हेल्पलाइन 01822-233777 जारी की गई है।
पंजाब में फसल अवशेष प्रबंधन के लिए सब्सिडी वाली मशीनरी और कस्टम हायरिंग सेंटरों का विस्तार पिछले वर्षों में पराली जलाने की घटनाओं को कम करने की नीति का एक प्रमुख हिस्सा रहा है।






