जिले के विभिन्न स्कूलों के 500 से ज्यादा विद्यार्थियों ने वामन प्रतियोगिताओं में भाग लिया, वामन अवतार की परंपरा और कुरुक्षेत्र के प्राचीन तीर्थ-संबंध को समर्पित प्रारंभ हुए धार्मिक, सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक आयोजन
कुरुक्षेत्र 22 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): कुरुक्षेत्र की प्राचीन तीर्थ परंपरा, धार्मिक विरासत और सांस्कृतिक चेतना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड, श्री ब्राह्मण एवं तीर्थोद्धार सभा, कुरुक्षेत्र सेवा मंडल तथा विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं के संयुक्त तत्वावधान में 22 से 23 सितंबर 2026 तक सन्निहित सरोवर, कुरुक्षेत्र में वामन द्वादशी मेला आयोजित किया जा रहा है। यह मेला केवल भगवान वामन की जयंती का धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि कुरुक्षेत्र की धारा पर भगवान विष्णु के वामन स्वरूप के प्राकट्य दिवस को मनाने का पर्व है। हिंदू धार्मिक परंपरा में भगवान वामन को भगवान विष्णु के 5वे और त्रेता युग के पहले अवतार माना जाता है। भाद्रपद शुक्ल द्वादशी को वामन जयंती अथवा वामन द्वादशी के रूप में मनाया जाता है। 2026 में यह पर्व 23 सितंबर को है।
कुरुक्षेत्र के संदर्भ में वामन परंपरा का विशेष महत्व इसलिए भी है कि महाभारत, पद्म पुराण और वामन पुराण में भगवान विष्णु के वामन स्वरूप का कुरुक्षेत्र से संबंध मिलने का उल्लेख विद्वत् स्रोतों में किया गया है। भारतीय कला एवं सांस्कृतिक विरासत से संबंधित इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रकाशन में भी इन ग्रंथों के आधार पर कुरुक्षेत्र में विष्णु के वामन स्वरूप की संबद्धता का उल्लेख मिलता है। कुरुक्षेत्र की 48 कोस में अनेक वामन से जुड़े तीर्थों का उल्लेख मिलता है। सोंगल, बोड़श्याम और बरसाना में वामन तीर्थ विद्यमान हैं। वामन द्वादशी मेले के लिए सन्निहित सरोवर का चयन भी अपनी धार्मिक परंपरा के कारण विशेष महत्व रखता है। सन्निहित का अर्थ ही तीर्थों के एकत्र होने से जोड़ा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि अमावस्या के अवसर पर विभिन्न तीर्थों की पवित्रता यहां एकत्र होती है और सन्निहित सरोवर को भगवान विष्णु का पवित्र निवास भी माना जाता है। इसी कारण सन्निहित सरोवर सदियों से श्राद्ध, पिंडदान, स्नान, ग्रहण-स्नान तथा विभिन्न धार्मिक मेलों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। सरकारी पर्यटन अभिलेखों में वामन द्वादशी को भी यहां आयोजित होने वाले पारंपरिक मेलों में शामिल किया गया है।

21 सितंबर भाद्रपद शुक्ल दशमी को मेले का शुभारंभ दोपहर 1.30 बजे सन्निहित सरोवर से कलश यात्रा के साथ किया गया। 22 सितंबर भाद्रपद शुक्ल एकादशी को प्रात: 9 बजे वामन अवतार एवं कुरुक्षेत्र विषय पर प्रदर्शनी तथा भगवान वामन से संबंधित शैक्षणिक प्रतियोगिताएं आयोजित हुई। दोपहर 2 बजे वामन पुराण कथा, सायं 6 बजे भजन संध्या एवं आरती तथा 6.30 बजे भगवान वामन अवतार पर आधारित नृत्य-नाटिका सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम का मंचन हुआ। 23 सितंबर भाद्रपद शुक्ल द्वादशी, वामन जयंती प्रात: 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक वामन पुराण कथा एवं भंडारा तथा प्रात: 10 बजे खेल प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। दोपहर 3 बजे भव्य शोभा यात्रा निकाली जाएगी, जिसका प्रारंभ दुःख भंजन मंदिर से होगा और समापन सन्निहित सरोवर पर होगा। सायं 5 बजे भगवान वामन स्वरूप का नौका-विहार एवं हिंडोला तथा सायं 6 बजे भजन संध्या एवं आरती होगी।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव उपेन्द्र सिंघल के अनुसार के अनुसार मेले में वामन पुराण कथा, धार्मिक अनुष्ठान, प्रदर्शनी, शैक्षणिक प्रतियोगिताएं, खेल प्रतियोगिताएं, शोभायात्रा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों को शामिल करने का उद्देश्य धार्मिक परंपरा को केवल अनुष्ठान तक सीमित न रखकर कुरुक्षेत्र के प्राचीन तीर्थ-माहात्म्य और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी से जोडऩा है। भगवान वामन की कथा में धर्म, मर्यादा, दान, विनम्रता और संतुलन जैसे मूल्यों का संदेश निहित माना जाता है। इसलिए वामन द्वादशी का यह आयोजन कुरुक्षेत्र की उस परंपरा को भी रेखांकित करता है जिसमें तीर्थ, धर्म, ज्ञान और लोक-संस्कृति एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।
कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने श्रद्धालुओं, कुरुक्षेत्र वासियों से आने वाले धर्मप्रेमी यात्रियों से वामन जयंती के अवसर पर सन्निहित सरोवर पहुंचकर धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सहभागी बनने का आह्वान किया है। वामन द्वादशी के कार्यक्रम में संध्या सांस्कृतिक कार्यक्रम का दीप प्रवजलन मुख्यमंत्री के ओसीडी कैलाश सैनी, बीजेपी जिला अध्यक्ष रमेश सैनी और थानेसर को पूर्व चेयरपर्सन उमा सुधा करेंगे। कार्यकर्मो में केडीबी के सदस्य अलकेश मोदगिल, अशोक रोशा, हरमेश सैनी, राजेश शांडिल्य, रोशन बेदी, डॉ संदीप छाबड़ा आदि ब्रह्मातीर्थदार संस्था के संरक्षक श्री है नारायण, रामपाल शर्मा, प्रधान यशेंद्र शर्मा जी आदि सभी कार्यकारिणी सदस्य उपस्थित रहे।






