फतेहगढ़ साहिब, 26 सितंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): धान की पराली के उचित प्रबंधन और फसल अवशेषों को आग न लगाने के संबंध में किसानों को तकनीकी जानकारी देने के उद्देश्य से कृषि विभाग द्वारा गांव बहलोलपुर में सीआरएम योजना के तहत आईईसी कंपोनेंट के अंतर्गत जागरूकता कैंप लगाया गया। इस दौरान किसानों को पराली प्रबंधन के लिए विभिन्न कृषि मशीनरी के इस्तेमाल संबंधी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
इस संबंध में जानकारी देते हुए मुख्य कृषि अधिकारी डॉ. जगदेव सिंह ने बताया कि धान की कटाई के बाद पराली को आग लगाए बिना मल्चर का इस्तेमाल करने के बाद सुपर सीडर के माध्यम से गेहूं की बुवाई आसानी से की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पराली को खेत की मिट्टी में मिलाने से उसकी उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि धान की पराली में फास्फोरस, पोटाश के अलावा विभिन्न सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद होते हैं, जो खेत की मिट्टी में जिंक, मैंगनीज आदि तत्वों की पूर्ति में सहायक होते हैं। पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी नरम बनी रहती है, जिससे फसल की जड़ों के विकास के लिए भी अनुकूल वातावरण तैयार होता है।
इस मौके पर कृषि विस्तार अधिकारी, सरहिंद श्री प्रभु नाथ ने किसानों को बताया कि हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, स्मार्ट सीडर और सरफेस सीडर जैसी कृषि मशीनरी का इस्तेमाल करके पराली को आग लगाए बिना गेहूं की बुवाई की जा सकती है। उन्होंने कहा कि पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार होता है और फसल की पैदावार तथा गुणवत्ता बेहतर बनाने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली को आग लगाने के बजाय इसके उचित प्रबंधन के लिए उपलब्ध कृषि मशीनरी का इस्तेमाल करें। उन्होंने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा विभिन्न कृषि मशीनें सब्सिडी पर उपलब्ध करवाई जा रही हैं, इसलिए किसान इन सुविधाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। इस मौके पर डॉ. इकबालजीत सिंह बैनीपाल, श्री जसविंदरपाल सिंह, कृषि विस्तार अधिकारियों सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।






