Monday, September 28, 2026
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“राजनीतिक मतभेद अपनी जगह, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान सबसे ऊपर” – मुख्यमंत्री

गुरुग्राम, 27 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज देश में आरोपों की राजनीति की नहीं, बल्कि तथ्यों की राजनीति की जरूरत है। लोकतंत्र में विपक्ष को सरकार का विरोध करने, सवाल पूछने और जवाब मांगने का पूरा अधिकार है, लेकिन सवाल तथ्यों पर आधारित होने चाहिए और यदि किसी संवैधानिक संस्था पर आरोप लगाए जाते हैं तो उसके पीछे ठोस सबूत भी होने चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं किसी एक सरकार या राजनीतिक दल की संस्थाएं नहीं हैं। इनकी प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता पूरे देश और लोकतंत्र की पूंजी है। इसलिए राजनीतिक मतभेदों के बावजूद इन संस्थाओं की गरिमा बनाए रखना सभी राजनीतिक दलों और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री रविवार को गुरुग्राम में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। प्रेस कॉन्फ्रेंस में हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह, सोहना के विधायक तेजपाल तंवर, पटौदी की विधायक बिमला चौधरी और मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेतली भी मौजूद रहे।

चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने से पहले विपक्ष तथ्यों को सामने रखे

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ समय से कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों की ओर से चुनाव आयोग, चुनाव प्रक्रिया और अन्य संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना लोकतंत्र का हिस्सा हो सकता है, लेकिन बिना सबूत के गंभीर आरोप लगाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है, जिस पर देश में चुनाव प्रक्रिया के संचालन तथा मतदाता सूची तैयार करने और उसे अपडेट करने की जिम्मेदारी है। चुनाव आयोग स्वयं भी योग्य नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने और मतदाता भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम करता है।

एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग की स्थिति स्पष्ट – मुख्यमंत्री

श्री नायब सिंह सैनी ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर (SIR) को लेकर विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे सवालों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग ने एसआईआर से जुड़े अपने फैसलों और प्रक्रिया के संबंध में स्थिति स्पष्ट की है। चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के अनुसार 24 जून 2025 को एसआईआर से संबंधित आदेश जारी किया गया था और बाद में विभिन्न राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में इसके संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए गए। उन्होंने कहा कि एसआईआर को लेकर फॉर्म-6 और घोषणा-पत्र के संबंध में भी भ्रम फैलाने का प्रयास किया गया, जबकि चुनाव आयोग के मौजूदा मतदाता सेवा पोर्टल पर फॉर्म-6 और संबंधित घोषणा-पत्र की प्रक्रिया स्पष्ट रूप से उपलब्ध है।

हर योग्य नागरिक का वोट का अधिकार सुरक्षित रहना लोकतंत्र की पहली जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र केवल चुनाव कराने से मजबूत नहीं होता। इसके लिए मतदाता सूची शुद्ध और पारदर्शी हो, हर योग्य नागरिक को वोट का अधिकार मिले, चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों और जनता का लोकतांत्रिक व्यवस्था में विश्वास मजबूत बना रहे—यह जरूरी है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि कोई भी योग्य नागरिक अपने मताधिकार से वंचित न रहे। उन्होंने बताया कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से जमीनी स्तर पर मतदाताओं से संपर्क किया जाता है और छूटे हुए योग्य नागरिकों तक पहुंचने का प्रयास किया जाता है। चुनाव आयोग ने भी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर फॉर्म एकत्र करने और मतदाताओं की सहायता किए जाने की जानकारी दी है।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का स्वाभाविक हिस्सा हैं, लेकिन इन मतभेदों के कारण लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा नहीं होना चाहिए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न श्री अटल बिहारी वाजपेयी के विचार का उल्लेख करते हुए कहा कि “चुनाव आएंगे, चुनाव जाएंगे, लेकिन राष्ट्र अमर रहना चाहिए।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव में जीत और हार लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा है। किसी चुनाव परिणाम के अपने पक्ष में न आने पर संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता पर सवाल उठाना उचित नहीं है। देश और लोकतंत्र सबसे ऊपर हैं तथा सभी राजनीतिक दलों को इसी भावना के साथ अपनी भूमिका निभानी चाहिए।

आज जरूरत आरोपों की नहीं, तथ्यों की राजनीति की

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज जरूरत आरोपों की राजनीति की नहीं, बल्कि तथ्यों की राजनीति की है। जरूरत भ्रम फैलाने की नहीं, बल्कि सच्चाई को जनता के सामने रखने की है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने आरोपों के साथ सबूत भी पेश करने चाहिए, ताकि जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करने के बजाय उन्हें मजबूत करना समय की जरूरत है। संस्थाओं की विश्वसनीयता पर अनावश्यक सवाल उठाने से अंततः लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के विश्वास पर असर पड़ता है।

सरकार का विरोध करें, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बनी रहे

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि विपक्ष को सरकार की नीतियों का विरोध करने का पूरा अधिकार है। सरकार से सवाल पूछे जाने चाहिए और जवाब भी मांगा जाना चाहिए, क्योंकि यही स्वस्थ लोकतंत्र की पहचान है। लेकिन राजनीतिक विरोध और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा—दोनों को अलग-अलग रखना जरूरी है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं, नीतियों और कार्यप्रणाली पर विपक्ष अपनी बात मजबूती से रख सकता है, लेकिन चुनाव आयोग या अन्य संवैधानिक संस्थाओं के बारे में गंभीर आरोप लगाने से पहले तथ्यों की जांच और सबूतों को सामने रखना चाहिए।

गरीब और वंचित वर्गों के जीवन में बदलाव का किया उल्लेख

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की ओर से गरीब और वंचित वर्गों के लिए किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में गरीब परिवारों तक आवास, गैस कनेक्शन, राशन, स्वास्थ्य सुविधाएं, नल से जल और किसानों के लिए आर्थिक सहायता जैसी योजनाओं का लाभ पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना और जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं ने आम नागरिक के जीवन को प्रभावित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और संवेदनशील मुद्दों पर भी जिम्मेदारी से बात करने की जरूरत

मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बयान देते समय सभी राजनीतिक दलों को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का परिचय देना चाहिए। उन्होंने कहा कि सेना, सुरक्षा और देश की रणनीतिक कार्रवाइयों से जुड़े मुद्दों पर बिना ठोस जानकारी के बयानबाजी जनता के बीच भ्रम पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार की आलोचना की जा सकती है, लेकिन देश की संस्थाओं और राष्ट्रीय हितों से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।

धारा 370 हटने से जम्मू-कश्मीर में लोगों को लोकतांत्रिक अधिकारों का विस्तार मिला – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में धारा 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक भागीदारी का विस्तार हुआ है। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता विपक्ष के कार्यों को भी देख रही है और यह भी देख रही है कि किस तरह राजनीतिक विरोध के नाम पर संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम फैसला जनता के हाथ में होता है और 2029 के लोकसभा चुनाव में भी जनता अपने मताधिकार का प्रयोग करते हुए राजनीतिक दलों के कार्यों और उनके व्यवहार का आकलन करेगी।

पंजाब में नशे की समस्या को लेकर कांग्रेस और आप पर मुख्यमंत्री ने उठाए सवाल

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने पंजाब का उल्लेख करते हुए कांग्रेस और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में पंजाब में नशे की समस्या गंभीर बनी रही और इस समस्या को प्रभावी ढंग से खत्म नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि बाद में आम आदमी पार्टी की सरकार के दौरान भी नशे की समस्या को लेकर लोगों की चिंताएं बनी रहीं। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियों की सोच ऐसी रही कि यदि युवा नशे में उलझा रहेगा तो वह रोजगार और अपने अधिकारों के सवाल नहीं उठाएगा। उन्होंने कहा कि पंजाब के युवाओं के भविष्य और नशे की समस्या पर राजनीति की बजाय ठोस कार्रवाई और परिणामों पर ध्यान देने की जरूरत है।

संवैधानिक संस्थाओं को मजबूत करना हम सभी की साझा जिम्मेदारी

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए चुनाव आयोग, न्यायपालिका और अन्य संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और विश्वसनीयता का सम्मान किया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि “राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा सबसे ऊपर है।” हर योग्य नागरिक को वोट का अधिकार मिले, मतदाता सूची शुद्ध और पारदर्शी हो, चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष हों और जनता का लोकतंत्र में विश्वास मजबूत बना रहे—यही लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश की जनता जागरूक है और वह तथ्यों को समझती है। इसलिए सभी राजनीतिक दलों को आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर सकारात्मक, तथ्यपूर्ण और जिम्मेदार राजनीतिक संवाद को मजबूत करना चाहिए।

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