कुरुक्षेत्र 29 सितंबर,2026 (संजीव शर्मा): उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि वायु प्रदूषण एवं धान अवशेष जलाने की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) द्वारा जिला प्रशासन को धान की पराली/धान अवशेष जलाने की घटनाओं की कड़ी निगरानी एवं रोकथाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए है। इन निर्देशों के तहत जिला प्रशासन एवं संबंधित विभागों द्वारा खेतों में धान अवशेष जलाने की घटनाओं पर विशेष निगरानी रखी जाएगी तथा किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए लगातार जागरूक किया जाएगा।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि विशेष रूप से धान अवशेष जलाने की घटनाओं के लिए संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर इन क्षेत्रों में ड्रोन के माध्यम से खेतों की निगरानी की जाएगी। ड्रोन के माध्यम से खेतों में आग लगने की घटनाओं की त्वरित पहचान की जाएगी ताकि संबंधित अधिकारियों द्वारा तत्काल मौके पर पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। जिला प्रशासन द्वारा संबंधित अधिकारियों एवं फील्ड स्टाफ को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में नियमित रूप से निगरानी रखें तथा धान अवशेष जलाने की किसी भी घटना की सूचना मिलने पर तुरंत आवश्यक कार्रवाई करें। वायु गुणवत्ता की निगरानी के लिए एयर क्वालिटी सेंसर स्थापित किए जाए। इन सेंसरों के माध्यम से वायु गुणवत्ता एवं प्रदूषण के स्तर की नियमित निगरानी की जाए। प्राप्त आंकड़ों का नियमित रूप से विश्लेषण कर प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखी जाए तथा आवश्यकता अनुसार संबंधित क्षेत्रों में अतिरिक्त निगरानी एवं नियंत्रण उपाय किए जाए।
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान धान अवशेष को किसी भी परिस्थिति में न जलाएं तथा उपलब्ध फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी एवं वैज्ञानिक तकनीकों का उपयोग करते हुए पराली का उचित प्रबंधन करें। धान अवशेष को खेत में मिलाकर मिट्टी की उर्वरता एवं जैविक कार्बन में सुधार किया जा सकता है तथा इसका उपयोग पशु चारे, कम्पोस्ट एवं अन्य उपयोगी उत्पादों के रूप में भी किया जा सकता है। धान अवशेष जलाने की घटनाओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत निगरानी की जा रही है और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में नियमानुसार कार्रवाई भी की जा रही है। जिला प्रशासन द्वारा किसानों, ग्राम पंचायतों, किसान संगठनों एवं आमजन से अपील की जाती है कि वे धान अवशेष जलाने से होने वाले वायु प्रदूषण एवं पर्यावरणीय नुकसान को रोकने में प्रशासन का सहयोग करें।






