Wednesday, September 30, 2026
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सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या के आधार पर डॉक्टरों और सहायक स्टाफ को मिलेगा स्पेशल इंसेंटिव – मुख्यमंत्री

हरियाणा , 30 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा):  हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के मरीजों को सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने के लिए प्रोत्साहित करने हेतु स्वास्थ्य विभाग प्रो-एक्टिव होकर कार्य करे। जिन सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ेगी, वहां के डॉक्टरों, सहायक स्टाफ और आयुष्मान मित्रों को स्पेशल इंसेंटिव राशि दी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने यह बात मंगलवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ आयोजित समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए कही। उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के मरीजों के इलाज के बदले सरकारी अस्पतालों को मिलने वाली राशि का उपयोग संबंधित अस्पताल में डॉक्टरों और स्टाफ के स्पेशल इंसेंटिव, अस्पताल के अपग्रेडेशन, सफाई कार्यों तथा आयुष्मान मित्रों को प्रोत्साहन राशि आदि पर किया जाएगा। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को सरकार ने मंजूरी दे दी है।

डायबिटिक रेटिनोपैथी का होगा मुफ्त इलाज

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए कि मुफ्त इलाज का दायरा अधिक से अधिक मरीजों तक पहुंचाने के लिए सरकारी अस्पतालों में आयुष्मान योजना के पैकेजों की संख्या बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि आंखों के मरीजों में होने वाली बीमारी डायबिटिक रेटिनोपैथी का इलाज भी सभी सरकारी अस्पतालों में मुफ्त किया जाएगा। इसे भी सरकारी अस्पतालों के पैकेज में शामिल किया जाए।

उन्होंने कहा कि इस बीमारी का इलाज अब इंजेक्शन के माध्यम से संभव हो गया है, जिसका खर्च सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

नियमित भर्ती के साथ ओपन भर्ती भी शुरू करने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों, रेडियोलॉजिस्टों और कार्डियोलॉजिस्टों के खाली पदों को तुरंत भरने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नियमित भर्ती के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग इन पदों के लिए विदेशों की तर्ज पर ओपन भर्ती भी शुरू करे। इसके तहत कोई भी इच्छुक विशेषज्ञ अपनी पसंद के स्थान और समय अवधि के लिए सरकारी अस्पतालों में सेवाएं देने की पेशकश कर सकेगा।

उन्होंने कहा कि ऐसा करने से सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञों की कमी दूर होगी और मरीजों को काफी लाभ मिलेगा। रेडियोलॉजिस्टों के मामले में एनएमसी में पंजीकृत रेडियोलॉजिस्टों की सूची के आधार पर सेवानिवृत्त रेडियोलॉजिस्टों की सेवाएं उनके नजदीकी अस्पतालों में ली जा सकती हैं। आवश्यकता पड़ने पर उन्हें आयु सीमा में छूट भी दी जाएगी।

निजी अस्पतालों के डॉक्टर भी सरकारी अस्पतालों में कर सकेंगे ऑपरेशन

मुख्यमंत्री ने कहा कि निजी अस्पतालों में कार्यरत और निजी प्रैक्टिस करने वाले विशेषज्ञ डॉक्टरों की सेवाएं भी सरकारी अस्पतालों में ली जा सकती हैं। उन्हें प्रति दिन या प्रति ऑपरेशन के आधार पर भुगतान किया जा सकता है।

इसके साथ ही जो सरकारी डॉक्टर अधिक मरीजों का इलाज कर रहे हैं, उन्हें विशेष रूप से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी, ताकि वे और अधिक लगन से कार्य करने के लिए प्रेरित हों। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में आवश्यकता के अनुसार आयुष्मान मित्रों की संख्या बढ़ाने के संबंध में भी निर्देश दिए।

सरकारी अस्पतालों की होगी रियल टाइम मॉनिटरिंग

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रदेश के सभी जिला और उपमंडल स्तर के अस्पतालों तथा सीएचसी, पीएचसी और सब-सेंटरों को ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लाने का कार्य तेजी से पूरा किया जाए।

इसके लिए मरीज के रजिस्ट्रेशन से लेकर उसके सभी प्रकार के टेस्ट, डॉक्टर की सलाह और दवा देने तक के कार्यों को रियल टाइम में दर्ज किया जाए, ताकि अस्पतालों की सभी गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा सके।

खराब उपकरण तुरंत ठीक करवाए जाएं

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में लगाए गए उपकरणों का उचित उपयोग सुनिश्चित किया जाए। यदि कोई उपकरण खराब हो जाता है तो उसे उसी दिन ठीक करवाया जाए, ताकि मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

यदि कोई उपकरण सरकारी कर्मचारी की लापरवाही के कारण खराब होता है या उसे लंबे समय तक ठीक नहीं करवाया जाता, तो संबंधित कर्मचारी की जिम्मेदारी तय की जाए। उन्होंने सरकारी अस्पतालों में कैथ लैब खोलने के लिए जल्द टेंडर जारी करने के निर्देश भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिए।

एचआईवी टास्क फोर्स की प्रगति की समीक्षा मुख्यमंत्री खुद करेंगे

मुख्यमंत्री ने जिला स्तरीय एचआईवी टास्क फोर्स की प्रगति की समीक्षा करते हुए कहा कि इस कार्य की समीक्षा हर चार महीने में वे स्वयं करेंगे। उन्होंने कहा कि सभी जिलों में उपायुक्त की अध्यक्षता में भी हर दो महीने बाद इस कार्य की समीक्षा अवश्य की जाए, ताकि टास्क फोर्स का काम प्रभावी ढंग से चलाया जा सके।

उन्होंने स्वास्थ्य विभाग को उपायुक्त और मुख्यमंत्री स्तर पर आयोजित होने वाली बैठकों का एजेंडा निर्धारित करने के निर्देश दिए। उन्होंने हांसी अस्पताल को जिला अस्पताल के रूप में अपग्रेड करने के संबंध में भी विशेष दिशा-निर्देश दिए।

हर जिले में 1 नवंबर तक अमृत फार्मेसी खोलने का लक्ष्य

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि सभी सरकारी अस्पतालों में अमृत फार्मेसी खोलने का काम 1 नवंबर तक हर हाल में पूरा कर लिया जाए। उन्होंने उन अस्पतालों की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए, जहां आयुष्मान भारत और चिरायु योजना के मरीजों के क्लेम औसत से कम आ रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक जिले में सीएमजीजीए (CMGGA) को अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर निगरानी रखने और उसमें सुधार के सुझाव देने के लिए निर्देशित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने मरीजों को राहत देने के लिए ई-उपचार के उपयोग, नशा मुक्ति केंद्रों के प्रभावी संचालन, आयुष्मान एवं चिरायु योजना के पात्र व्यक्तियों के पंजीकरण के लिए विशेष अभियान चलाने, अस्पतालों में साफ-सफाई के कार्यों पर विशेष ध्यान देने तथा आयुष्मान क्लेम की निगरानी के लिए नियमित रिपोर्टिंग करने के निर्देश दिए।

उन्होंने निजी और सरकारी अस्पतालों में पैकेजवार तुलना सहित स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली में सुधार के लिए पिछली बैठक में दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विभाग द्वारा किए गए कार्यों की भी समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

बैठक में मुख्यमंत्री के मुख्य प्रधान सचिव श्री राजेश खुल्लर, स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान विभाग के सचिव श्री सी.जी. रजनीकांतन, निदेशक श्री धीरेंद्र खड़गटा, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ. यशपाल सिंह, स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक डॉ. मनीष बंसल, एनएचएम के प्रबंध निदेशक डॉ. रिपुदमन सिंह ढिल्लों और डॉ. मनोज कुमार सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

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