हरियाणा, 30 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि हरियाणा की अपनी वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने का लक्ष्य टैक्स की दरें बढ़ाकर नहीं, बल्कि टैक्स आधार का विस्तार, बेहतर अनुपालन, राजस्व के नुकसान पर रोक और आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल के माध्यम से हासिल किया जाएगा। सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि ईमानदार करदाताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना राज्य की वित्तीय क्षमता को बढ़ाया जाए।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी बुधवार को विकसित हरियाणा-2047 के लिए ‘हरियाणा की अपनी कर-वित्तीय व्यवस्था’ के विश्लेषण और मजबूती के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (SJHIFM) द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरुण गुप्ता, आबकारी एवं कर विभाग की आयुक्त एवं सचिव श्रीमती आशिमा बराड़, एसजेएचआईएफएम के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू और सलाहकार श्री एन.के. बिश्नोई सहित नीति-निर्माता, कर प्रशासक, अर्थशास्त्री, शिक्षाविद् और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए।
मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि मजबूत वित्तीय व्यवस्था का अंतिम उद्देश्य केवल अधिक राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि इससे बेहतर सड़कें, स्कूल, अस्पताल और सार्वजनिक सेवाएं उपलब्ध करवाकर आम लोगों के जीवन में सुधार लाना है। उन्होंने कहा कि करदाता को नियमों और प्रक्रियाओं की स्पष्ट जानकारी मिले तथा टैक्स अनुपालन उसके लिए आसान और पारदर्शी हो, यह सरकार की प्राथमिकता है।
एसजीएसटी कलेक्शन में 29 प्रतिशत की वृद्धि: मुख्यमंत्री ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले पांच महीनों, अप्रैल से अगस्त तक, हरियाणा का राज्य वस्तु एवं सेवा कर (SGST) कलेक्शन 29 प्रतिशत बढ़कर 24,662 करोड़ रुपये हो गया है। पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह कलेक्शन 19,174 करोड़ रुपये था। अगस्त 2026 में भी हरियाणा के एसजीएसटी कलेक्शन में 21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि राष्ट्रीय औसत वृद्धि 13 प्रतिशत रही।
उन्होंने कहा कि देश के कुल जीएसटी करदाताओं में हरियाणा की हिस्सेदारी 4 प्रतिशत से कम है, लेकिन देश के कुल जीएसटी कलेक्शन में राज्य का योगदान लगभग 7.7 प्रतिशत है। अब आवश्यकता इस वृद्धि को स्थायी वित्तीय क्षमता में बदलने की है।
आर्थिक विकास के साथ बढ़ेगा राजस्व आधार: मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा कृषि-प्रधान अर्थव्यवस्था से उद्योग और सेवा क्षेत्र आधारित अर्थव्यवस्था की ओर तेजी से आगे बढ़ा है। गुरुग्राम में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, आईटी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत सेवाओं का विस्तार हो रहा है। गन्नौर में इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट, आईएमटी खरखौदा में वाहन निर्माण निवेश तथा रेवाड़ी, हिसार और अन्य क्षेत्रों में औद्योगिक एवं लॉजिस्टिक्स परियोजनाएं राज्य की आधुनिक आर्थिक गतिविधियों को नई गति दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि पानीपत का टेक्सटाइल उद्योग, अंबाला का वैज्ञानिक उपकरण उद्योग, हिसार का स्टील उद्योग, यमुनानगर का प्लाईवुड उद्योग और रोहतक का नट-बोल्ट एवं ऑटो-कंपोनेंट उद्योग जैसे पारंपरिक एमएसएमई क्लस्टर भी राज्य की आर्थिक शक्ति का महत्वपूर्ण आधार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर नया उद्योग, निवेश और उद्यम रोजगार के साथ-साथ नए राजस्व आधार की संभावनाएं भी पैदा करता है।
2030 तक 10 और 2047 तक 15 प्रतिशत का लक्ष्य: मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राज्य की आर्थिक क्षमता की तुलना में हरियाणा का अपना कर-राजस्व अभी जीएसडीपी के 7 प्रतिशत से कम है। इसे वर्ष 2030 तक 10 प्रतिशत और वर्ष 2047 तक 15 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि यह लक्ष्य टैक्स की दरें बढ़ाकर हासिल नहीं किया जाएगा। इसके लिए मौजूदा वित्तीय व्यवस्था की दक्षता, कवरेज और उत्पादकता बढ़ाने, टैक्स आधार का विस्तार करने, नियमों के अनुपालन को प्रोत्साहित करने और राजस्व के नुकसान को रोकने पर जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि दर नहीं, आधार बढ़ाना है; बोझ नहीं, अनुपालन बढ़ाना है।
उन्होंने कहा कि जब से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने देश की बागडोर संभाली है, तब से बाहरी निवेशकों का भारत में विश्वास बढ़ा है। विकसित हरियाणा से ही विकसित भारत का रास्ता साफ होगा।
वन टाइम सेटलमेंट की अवधि 30 नवंबर तक बढ़ाई: मुख्यमंत्री ने बताया कि पुराने लंबित कर विवादों के समाधान के लिए ‘हरियाणा वन-टाइम सेटलमेंट स्कीम, 2026’ लागू की गई है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों का निपटारा करना और अनावश्यक मुकदमेबाजी को कम करना है। वर्ष 2025 की योजना का लाभ लगभग 1 लाख 15 हजार व्यापारियों ने लिया था। व्यापारियों की सुविधा के लिए इस वर्ष की योजना की अवधि बढ़ाकर 30 नवंबर कर दी गई है।
उन्होंने कहा कि ‘पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0’ और ‘ऑटो म्यूटेशन सिस्टम’ के माध्यम से रजिस्ट्रेशन और इंतकाल की प्रक्रियाओं को डिजिटल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाया जा रहा है।
एआई और डेटा विश्लेषण से आधुनिक होगा कर प्रशासन: मुख्यमंत्री ने कहा कि भविष्य की वित्तीय व्यवस्था डेटा आधारित और आधुनिक तकनीक से सक्षम होनी चाहिए। जीएसटी, रजिस्ट्रेशन, परिवहन, बिजली, शहरी विकास और अन्य सरकारी प्रणालियों के आंकड़ों को आपस में जोड़कर आर्थिक गतिविधियों की व्यापक तस्वीर तैयार की जा सकती है। इससे राजस्व की संभावनाओं और कमियों की पहचान करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, उन्नत डेटा विश्लेषण और एकीकृत डेटाबेस के माध्यम से जोखिम की पहचान, राजस्व के नुकसान को रोकने और नियमों के अनुपालन को बेहतर किया जा सकता है। हालांकि, तकनीक का उद्देश्य केवल निगरानी नहीं होना चाहिए, बल्कि ईमानदार करदाताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध करवाना भी होना चाहिए।
करदाता को केंद्र में रखकर बने कार्ययोजना: मुख्यमंत्री ने सम्मेलन में विशेषज्ञों को अगले एक-दो वर्षों के तत्काल उपायों, मध्यम अवधि के सुधारों, भविष्य की तकनीक एवं डेटा प्रणालियों तथा आवश्यक संस्थागत बदलावों पर स्पष्ट कार्ययोजना तैयार करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि पूरी कार्ययोजना के केंद्र में करदाता होना चाहिए। सभी विभागों में बेहतर तालमेल हो, नागरिक का समय बचे, उसकी अनिश्चितता कम हो और उसे बेहतर सुविधा मिले। ईमानदारी से टैक्स देने वाले नागरिक को सम्मान मिले और नियमों का पालन न करने वालों के खिलाफ प्रभावी व्यवस्था हो।
मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव ने बताई महत्वपूर्ण पहल: मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव एवं वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव श्री अरुण गुप्ता ने कहा कि ‘विकसित भारत-विकसित हरियाणा’ के लक्ष्य को साकार करने के लिए राज्य के संसाधनों को मजबूत और व्यापक करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि राज्य को संसाधन मुख्य रूप से भारत सरकार से अनुदान एवं सहयोग, ऋण और अपने स्वयं के राजस्व के माध्यम से प्राप्त होते हैं। ऐसे में यह सम्मेलन राज्य के अपने राजस्व को बढ़ाने, राजस्व संग्रह की कार्यप्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने और नीतिगत स्तर पर आवश्यक बदलाव करके वित्तीय व्यवस्था में मौजूद संभावित कमियों को दूर करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में प्राप्त मार्गदर्शन और सुझावों को नीतिगत स्तर पर आगे बढ़ाते हुए राज्य के राजस्व संसाधनों को मजबूत करने और हरियाणा के आर्थिक ढांचे को सुदृढ़ बनाने के लिए ठोस प्रयास किए जाएंगे।
मुख्य आर्थिक सलाहकार ने की हरियाणा की आर्थिक क्षमता की सराहना: भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने हरियाणा की आर्थिक क्षमता को रेखांकित करते हुए कहा कि राज्य के पास वर्ष 2047 तक 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को हासिल करने की क्षमता, आर्थिक गतिशीलता, मजबूत औद्योगिक आधार, उद्यमिता की भावना और सुशासन मौजूद है।
उन्होंने हरियाणा को भारत के विनिर्माण क्षेत्र के प्रमुख उदाहरणों में से एक बताते हुए कहा कि राज्य विनियमन को सरल बनाने और अनुपालन के बोझ को कम करने में अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। उन्होंने विश्वास-आधारित और जोखिम-आधारित नियमों तथा छोटे एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया।
डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने बताया कि हरियाणा के अपने राजस्व में लगभग आधा हिस्सा राज्य जीएसटी से आता है और इसमें राज्य में होने वाले कारोबार का हिस्सा 51 प्रतिशत, जबकि आईजीएसटी के माध्यम से आने वाला हिस्सा 49 प्रतिशत है।
डॉ. राज नेहरू ने सम्मेलन को बताया महत्वपूर्ण कड़ी: स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट के महानिदेशक डॉ. राज नेहरू ने कहा कि यह सम्मेलन केंद्र सरकार के 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करने, हरियाणा को 1.5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने, 50 लाख नए रोजगार पैदा करने और सुशासन के संकल्प को पूरा करने के लिए जरूरी पहलुओं पर विचार-विमर्श करने तथा विशेषज्ञों के सुझावों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कड़ी साबित होगा।






