समरकंद, 19 अक्टूबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रहे व्यापार समझौते को लेकर एक अहम संकेत सामने आया है। अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि दोनों देश व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के काफी करीब हैं। उनके इस बयान को दोनों देशों के आर्थिक और रणनीतिक संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उज्बेकिस्तान के समरकंद में पत्रकारों से बातचीत करते हुए रुबियो ने कहा कि अमेरिका इस समय भारत के साथ व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहा है और दोनों पक्ष इस लक्ष्य के काफी करीब पहुंच चुके हैं।
रुबियो 20 अक्टूबर को मुंबई पहुंचने वाले हैं, जहां वह भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे। इसके बाद उनके जामनगर जाने का भी कार्यक्रम है, जहां दुनिया की प्रमुख तेल रिफाइनरियों में से एक स्थित है। भारत दौरे के दौरान वह दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी, क्षेत्रीय एवं वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे।
रूसी तेल की खरीद और टैरिफ का मामला
इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूसी तेल और गैस की खरीद से जुड़े कुछ प्रस्तावित टैरिफ और प्रतिबंधों को लागू करने के मामले में 60 दिनों का विराम दिया है। प्रस्तावित कानून के तहत रूसी कच्चे तेल या प्राकृतिक गैस के पांच सबसे बड़े आयातक देशों से अमेरिका आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इन देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।
रुबियो ने कहा कि रूस पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ अन्य देशों पर टैरिफ लगाने के आर्थिक प्रभावों का आकलन करना भी जरूरी है। उनके अनुसार, भारत ने अपने ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने का प्रयास किया है, लेकिन रूस से ऊर्जा खरीद को तुरंत पूरी तरह बंद करना आसान नहीं है।
उन्होंने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार बताते हुए कहा कि विदेश नीति से जुड़े फैसले लेते समय ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक बाजार और आर्थिक प्रभावों सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखना पड़ता है।
वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति भी चिंता का विषय
अमेरिकी विदेश मंत्री ने रूस-यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हो रहे हमलों और मध्य पूर्व में तनाव को भी वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा कीमतों को प्रभावित करने वाले कारक बताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए किसी भी प्रतिबंध या टैरिफ के संभावित परिणामों का अध्ययन करना आवश्यक है।
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के प्रयास तथा ऊर्जा संबंधी नीतियों पर चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब दोनों देश अपने आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं।
हालांकि, व्यापार समझौते के अंतिम स्वरूप और उसकी शर्तों को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा का इंतजार है। इसी तरह, प्रस्तावित टैरिफ पर 60 दिनों के विराम की अवधि, उसके दायरे और लागू होने की शर्तों की भी आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।






