Thursday, November 5, 2026
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राखीगढ़ी ऐतिहासिक स्थल हजारों साल पुरानी पहचान, अपनेपन और स्वाभिमान का प्रतीक: मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

राखीगढ़ी के संग्रहालय और इंटरप्रिटेशन सेंटर का सिविल कार्य लगभग पूरा, अगले चरण में 188 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जाएगा विश्वस्तरीय केंद्र
राखीगढ़ी,20 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि राखीगढ़ी की मिट्टी में हमारे पूर्वजों की मेहनत, कौशल और एक विकसित सभ्यता की स्मृतियां सुरक्षित हैं। यह ऐतिहासिक स्थल हमारी हजारों वर्ष पुरानी पहचान, अपनेपन और स्वाभिमान का प्रतीक है। सरकार राखीगढ़ी के संरक्षण, शोध, पर्यटन और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

मुख्यमंत्री सोमवार को हिसार जिले के राखीगढ़ी में सात दिवसीय ‘राखीगढ़ी महोत्सव-2026’ के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे। इस वर्ष महोत्सव की थीम ‘मिट्टी से महोत्सव तक’ रखी गई है। इस अवसर पर विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने राखीगढ़ी की ग्राम पंचायत की ओर से सौंपे गए मांग-पत्र को पूरा करने का आश्वासन दिया। साथ ही, उन्होंने ग्राम पंचायत को 51 लाख रुपये देने की घोषणा भी की।

इससे पहले मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने राखीगढ़ी में निर्माणाधीन संग्रहालय का निरीक्षण किया। उन्होंने महोत्सव में लगाए गए विभिन्न स्टॉलों से खरीदारी भी की और खेल गतिविधियों सहित आयोजन स्थल पर चल रही अन्य गतिविधियों का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने पुरातत्व विभाग की ओर से लगाए गए खुदाई के डेमो का भी निरीक्षण किया। इसमें खुदाई की प्रक्रिया समझाने के साथ-साथ खुदाई के दौरान प्राप्त अवशेषों को प्रदर्शित किया गया था। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी, कैबिनेट मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा और हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने सील का भी निरीक्षण किया।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि राखीगढ़ी का यह महोत्सव हमें अपनी जड़ों को जानने और आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने का अवसर प्रदान करेगा। ‘मिट्टी से महोत्सव तक’ की थीम में हमारी सांस्कृतिक यात्रा समाहित है। यही मिट्टी किसान के हाथों में अन्न बनती है, कुम्हार के हाथों में आकार लेती है और कलाकार के हाथों में संस्कृति की अभिव्यक्ति बन जाती है।

उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र ने मानवता को कर्म का संदेश दिया, जबकि राखीगढ़ी ने हजारों वर्ष पहले की विकसित मानव संस्कृति को उजागर किया है। यहां मानव जीवन, हस्तकला, कृषि और सामुदायिक व्यवस्था के विकास की महत्वपूर्ण कहानी धरती की परतों में सुरक्षित है। यहां मिले मिट्टी के बर्तन, मनके, मुहरें और हस्तकला से जुड़ी वस्तुएं हमारे पूर्वजों की रचनात्मकता की पहचान कराती हैं।

नई पीढ़ी को विरासत से जोड़ना जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास की सार्थकता उससे मिलने वाली सीख में भी निहित है। राखीगढ़ी की सुव्यवस्थित बस्ती हमें यह सोचने का अवसर देती है कि हम अपने गांवों और शहरों को अधिक स्वच्छ, संवेदनशील और प्रकृति के अनुकूल कैसे बना सकते हैं।

उन्होंने युवाओं से अपनी विरासत को जानने और उसकी सही जानकारी आगे पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भाषाएं सीखें, संवाद कौशल बढ़ाएं और डिजिटल माध्यमों के जरिए राखीगढ़ी की प्रामाणिक कहानी लोगों तक पहुंचाएं। स्कूलों में राखीगढ़ी विषय पर प्रश्नोत्तरी जैसी गतिविधियां आयोजित करना भी इस दिशा में उपयोगी पहल है।

मुख्यमंत्री ने शिक्षकों और अभिभावकों से बच्चों को स्थानीय विरासत से परिचित करवाने तथा उन्हें ऐतिहासिक स्थलों और संग्रहालयों में ले जाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जिस बच्चे को अपने आसपास के इतिहास की जानकारी होगी, वह दुनिया में कहीं भी जाकर अपनी धरती की कहानी गर्व और प्रामाणिकता के साथ बता सकेगा।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में राखीगढ़ी पर होगी चर्चा

मुख्यमंत्री ने कहा कि महोत्सव के तहत एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है, जिसमें देश-विदेश के विद्वान राखीगढ़ी से प्राप्त साक्ष्यों, नई खोजों और भविष्य में शोध की संभावनाओं पर विचार-विमर्श करेंगे। इससे नई शोध योजनाओं, संस्थागत सहयोग और ज्ञान के व्यापक प्रसार का आधार तैयार होगा।

उन्होंने विद्वानों और पुरातत्व वैज्ञानिकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि वे धरती की परतों का अध्ययन करके बिखरे हुए साक्ष्यों को जोड़ते हैं और मानव सभ्यता के अनकहे अध्यायों को सामने लाते हैं।

राखीगढ़ी के विकास पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकास भी, विरासत भी’ का विजन देश के सामने रखा है। आधुनिक भारत का निर्माण अपनी सांस्कृतिक जड़ों से शक्ति प्राप्त करके हो, यही उनकी सोच है। केंद्र सरकार द्वारा जिन पांच पुरातात्विक स्थलों को ‘आइकॉनिक साइट’ के रूप में विकसित करने की घोषणा की गई थी, उनमें राखीगढ़ी भी शामिल है।

उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी को पर्यटन के नक्शे पर प्रमुख स्थान दिलाने के लिए कई ठोस कदम उठाए गए हैं। राखीगढ़ी को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल करवाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यहां के अवशेषों पर गहन शोध के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों को आमंत्रित किया गया है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि यहां संग्रहालय और इंटरप्रिटेशन सेंटर के निर्माण का सिविल कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अगले चरण में लगभग 188 करोड़ रुपये की लागत से इसे विश्वस्तरीय केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने सरस्वती-सिंधु सभ्यता कॉरिडोर विकसित करने की परिकल्पना भी की है। इसके माध्यम से महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थलों के बीच पर्यटन की दृष्टि से बेहतर संपर्क और समन्वय विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी के अलावा प्रदेश के अन्य पुरातात्विक महत्व वाले स्थलों के विकास के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। पुरानी तहसील की इमारत, नूंह; लोहारू का किला और तावड़ू का मकबरा परिसर को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। पंचकूला के सेक्टर-5 में अत्याधुनिक पुरातत्व संग्रहालय स्थापित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि प्राचीन संस्कृति के संरक्षण और उसकी पहचान बनाए रखने के लिए सभी राज्य संरक्षित स्मारकों की योजना और बाहरी डिजाइन की रूपरेखा तैयार करने की योजना शुरू की गई है। हरियाणा की कला और सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षा, संरक्षण, प्रोत्साहन और बढ़ावा देने के लिए राज्य कला एवं संस्कृति नीति ‘कलश’ बनाई गई है।

मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारतीय संस्कृति की धरोहरों को सुरक्षित रखकर आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से परिचित करवाना सरकार की प्रतिबद्धता है। इसी दिशा में कुरुक्षेत्र की धरती पर अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव का आयोजन किया जाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार अपनी विरासत और धरोहर को सहेजते हुए उसके आधार पर आधुनिक हरियाणा के निर्माण में जुटी है। राखीगढ़ी महोत्सव भी इसी उद्देश्य को आगे बढ़ाता है और ऐतिहासिक धरोहर को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि वे इस महोत्सव से अपनी मिट्टी को जानने, अपनी विरासत को संजोने और उससे मिली प्रेरणा के आधार पर बेहतर भविष्य बनाने का संकल्प लेकर जाएं।

राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के लिए मिलकर करेंगे प्रयास: डॉ. अरविंद शर्मा

हरियाणा के विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राखीगढ़ी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने और यहां विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए सामूहिक प्रयास किए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर विकास और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी के पुरातात्विक अवशेष हमारी प्राचीन सभ्यता और पूर्वजों के रहन-सहन के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। यहां मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि प्राचीन समय में लोग जल निकासी, स्वच्छ पेयजल, कृषि और बैलगाड़ी जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग करते थे। मिट्टी से बनी वस्तुएं उस समय के कारीगरों के कौशल और रचनात्मकता को भी दर्शाती हैं।

डॉ. अरविंद शर्मा ने कहा कि राखीगढ़ी महोत्सव के माध्यम से लोगों, विशेषकर युवाओं को अपनी ऐतिहासिक विरासत को करीब से जानने का अवसर मिल रहा है। महोत्सव के दौरान युवाओं के सीखने के लिए छोटे-छोटे पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण से जुड़ी गतिविधियां भी आयोजित की गई हैं।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी राखीगढ़ी का उल्लेख किया है और इसे आइकॉनिक साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में राखीगढ़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयास आगे बढ़ रहे हैं।

राखीगढ़ी महोत्सव युवाओं को संस्कृति और विरासत से जोड़ने का माध्यम: डॉ. अमित अग्रवाल

विरासत एवं पर्यटन विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का राखीगढ़ी पहुंचने पर स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में शुरू हुआ राखीगढ़ी महोत्सव अब अपने तीसरे आयोजन तक पहुंच गया है।

उन्होंने बताया कि महोत्सव के माध्यम से आसपास के स्कूलों और कॉलेजों के विद्यार्थियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि युवा पीढ़ी अपनी प्राचीन संस्कृति और विरासत को पहचाने तथा उससे जुड़ी रहे। उन्होंने मंच पर उपस्थित विरासत एवं पर्यटन मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा का भी अभिनंदन किया और कहा कि उनके नेतृत्व में विभाग आगे बढ़ रहा है। अगले सात दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव के माध्यम से मुख्यमंत्री के नेतृत्व में निर्धारित लक्ष्यों को पूरा किया जाएगा।

डॉ. अमित अग्रवाल ने कहा कि राखीगढ़ी को देश के प्रमुख पुरातात्विक स्थलों में नई पहचान दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। यहां ओपन म्यूजियम और साइट म्यूजियम विकसित करने की योजना है। साइट म्यूजियम का ढांचा तैयार हो चुका है और इसे अगले महोत्सव से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने कहा कि राखीगढ़ी का प्रचार-प्रसार बढ़ने से देश-विदेश से पर्यटक यहां आएंगे। इससे हड़प्पा-सिंधु सभ्यता की समृद्ध विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। राखीगढ़ी महोत्सव हिसार जिले की आन-बान-शान है।

इस अवसर पर विधायक श्री विनोद भयाना, विधायक श्री रामकुमार गौतम, श्रीमती सावित्री जिंदल, श्री रणधीर पनिहार, पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के निदेशक श्री अमित खत्री, उपायुक्त श्री राहुल नरवाल, पूर्व मंत्री कैप्टन अभिमन्यु, मीडिया कोऑर्डिनेटर श्री अशोक छाबड़ा, राखीगढ़ी की सरपंच मीनाक्षी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

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