किफायती कीमतों पर गुलाब, मनी प्लांट और आकर्षक फूलों के पौधे पर्यटकों को आ रहे पसंद
फरीदाबाद, 25 अक्टूबर, 2026 (संजीव शर्मा): फरीदाबाद के सूरजकुंड परिसर में आयोजित तीसरे सूरजकुंड दिवाली मेले-2026 में इस बार विभिन्न किस्मों के सुंदर और आकर्षक पौधों की नर्सरी पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है। मेले में खुशबू नर्सरी की ओर से घर, आंगन, बालकनी और कार्यालयों की सुंदरता बढ़ाने के लिए विभिन्न प्रकार के सजावटी पौधे उपलब्ध करवाए गए हैं।
नर्सरी में किफायती कीमतों पर गुलाब की कई किस्मों के पौधों के साथ-साथ मनी प्लांट और विभिन्न प्रकार के फूलों एवं सजावटी पौधों की विस्तृत श्रृंखला मौजूद है। पर्यटक अपनी पसंद और जरूरत के अनुसार पौधों की खरीदारी कर रहे हैं। दिवाली के अवसर पर अपने घरों और कार्यस्थलों को हरियाली तथा प्राकृतिक सुंदरता से सजाने के इच्छुक लोगों के लिए यह नर्सरी विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
दिवाली के त्योहार पर सजावटी पौधे न केवल घरों की सुंदरता बढ़ाते हैं, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता का संदेश भी देते हैं। ऐसे में सूरजकुंड दिवाली मेले में उपलब्ध विभिन्न प्रकार के पौधे प्रकृति प्रेमियों और बागवानी के शौकीनों के लिए खरीदारी का बेहतरीन विकल्प बने हुए हैं।
हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व और पर्यटन एवं विरासत मंत्री डॉ. अरविंद कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में सूरजकुंड परिसर में तीसरे सूरजकुंड दिवाली मेले-2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह मेला 26 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगा। मेले में खरीदारी, सजावट और पारंपरिक त्योहारों के माहौल के बीच पौधों की नर्सरी पर्यटकों को प्रकृति से जुड़ने और अपने आसपास के वातावरण को हरा-भरा बनाने का अवसर प्रदान कर रही है।
सूरजकुंड दिवाली मेले में नगाड़ों की थाप और बीन की सुरीली धुन पर झूम रहे पर्यटक
लोक कला और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने के उद्देश्य से सूरजकुंड परिसर में आयोजित तीसरा सूरजकुंड दिवाली मेला-2026 पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। मेले में नगाड़ों की गूंजती थाप और बीन की सुरीली धुनें यहां आने वाले पर्यटकों को झूमने पर मजबूर कर रही हैं। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की मधुर स्वर लहरियों के बीच पर्यटक मेले का भ्रमण करते हुए लोक संस्कृति और संगीत का आनंद ले रहे हैं।
मेले के परिसर में कलाकारों की ओर से प्रस्तुत किया जा रहा पारंपरिक संगीत पर्यटकों को भारतीय लोक परंपराओं से परिचित करवा रहा है। नगाड़ों की दमदार थाप जहां उत्साह और जोश का संचार कर रही है, वहीं बीन की मधुर धुनें लोगों को लोक संगीत की समृद्ध परंपरा का अनुभव करवा रही हैं। इन प्रस्तुतियों को देखने और सुनने के लिए पर्यटक रुक रहे हैं तथा कलाकारों का उत्साह बढ़ा रहे हैं।
सूरजकुंड दिवाली मेले में लोक वाद्ययंत्रों और पारंपरिक संगीत की प्रस्तुतियां त्योहार के माहौल को और भी जीवंत बना रही हैं। परिवारों के साथ मेले में पहुंच रहे पर्यटक खरीदारी और खान-पान के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आनंद ले रहे हैं। नगाड़ों की थाप पर थिरकते लोग और बीन की धुनों का आनंद लेते पर्यटक मेले की रौनक बढ़ा रहे हैं।
लोक संगीत भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण पहचान है। पारंपरिक वाद्ययंत्रों के माध्यम से कलाकार पीढ़ियों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं। ऐसे आयोजनों के माध्यम से पर्यटकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों को देश की लोक कलाओं तथा पारंपरिक संगीत से परिचित होने का अवसर मिलता है।







