नई दिल्ली/ओटावा, 26 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): भारत और केनैडा के बीच द्विपक्षीय व्यापार को नई गति देने के लिए प्रस्तावित व्यापार समझौते पर सहमति बनने की संभावनाएं तेज हो गई हैं। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश के. पटनायक ने उम्मीद जताई है कि दोनों देश नवंबर में समझौते पर सहमत हो सकते हैं। उनके अनुसार, समझौते के अधिकांश पहलुओं पर काम पूरा हो चुका है और अब कुछ लंबित मुद्दों के समाधान तथा कानूनी समीक्षा की प्रक्रिया जारी है।
एक टीवी समाचार कार्यक्रम को दिए विशेष साक्षात्कार में पटनायक ने कहा कि वह समझौते को लेकर काफी आशावादी हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दिसंबर में प्रस्तावित कनाडा यात्रा से पहले ही समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है।
2030 तक 70 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य
भारत और केनैडा ने वर्ष 2030 तक अपने सालाना द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 30.4 अरब डॉलर रहा था।
पिछले साल नवंबर में दोनों देशों के नेताओं ने व्यापार वार्ता दोबारा शुरू करने और व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) की दिशा में आगे बढ़ने पर सहमति जताई थी। इस साल मार्च में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत का दौरा किया था। वहीं, अक्टूबर में केनैडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू करीब 300 सदस्यों वाले व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ भारत आए थे।
दालों के आयात शुल्क पर हो सकती है चर्चा
प्रस्तावित समझौते में केनैडा से आयात होने वाली दालों पर भारत द्वारा लगाए जाने वाले शुल्क का मुद्दा महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल कनाडाई मसूर पर 10 प्रतिशत और पीली मटर पर 30 प्रतिशत आयात शुल्क लागू है।
भारतीय उच्चायुक्त के अनुसार, दोनों देश ‘टैरिफ रेट कोटा’ व्यवस्था पर विचार कर रहे हैं। इसके तहत निर्धारित मात्रा तक दालों का आयात बिना शुल्क या रियायती शुल्क पर किया जा सकता है, जबकि तय सीमा से अधिक आयात पर शुल्क लागू होगा। हालांकि, इस व्यवस्था की अंतिम शर्तों पर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
पटनायक ने कहा कि भारत में दालों की खपत बढ़ रही है और केनैडा लंबे समय तक भारत के लिए एक महत्वपूर्ण आपूर्तिकर्ता बना रह सकता है।
केनैडा के कृषि क्षेत्र को मिल सकता है लाभ
केनैडा का सस्केचेवान प्रांत भारत को निर्यात करने वाले प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। यहां की अर्थव्यवस्था में पोटाश, मसूर और सूखी मटर के निर्यात की महत्वपूर्ण भूमिका है। ऐसे में व्यापार समझौता होने से केनैडा के कृषि क्षेत्र और किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
कुछ वर्ष पहले भारत और केनैडा के संबंधों में तनाव पैदा हो गया था, लेकिन अब दोनों देश आर्थिक सहयोग और व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। हालांकि, समझौते की अंतिम शर्तों और औपचारिक घोषणा को लेकर अभी इंतजार करना होगा।






