कुरुक्षेत्र, 27 अक्टूबर 2026 (संजीव शर्मा): कृषि एवं किसान कल्याण विभाग कुरुक्षेत्र के उपनिदेशक डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि हरियाणा द्वारा धान की पराली जलाने की समस्या पर अंकुश लगाने, पर्यावरण संरक्षण तथा मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने के उद्देश्य से फसल अवशेष प्रबंधन को योजना के तहत धान के अवशेषों का निर्धारित मानदंडों के अनुसार उचित प्रबंधन करने वाले पात्र किसान 1200 प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जा रही है। इसके साथ-साथ किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन से संबंधित अनुमोदित कृषि यंत्रों की खरीद पर भी योजना के निर्धारित प्रावधानों के अनुसार अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है।
डीडीए डा. गिरीश नागपाल ने कहा कि किसान धान की कटाई के बाद पराली को आग लगाने के बजाय आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से खेत में ही उसका प्रबंधन कर सकते हैं अथवा पराली को खेत से बाहर निकालकर विभिन्न उपयोगों में ला सकते हैं। खेत में पराली का प्रबंधन करने के लिए सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, स्मार्ट सीडर तथा अन्य उपयुक्त कृषि यंत्रों का उपयोग किया जा सकता है। वहीं एक्स-सीटू प्रबंधन के अंतर्गत बेलर की सहायता से पराली की गांठें बनाकर उनका उपयोग पशु चारे, बायोमास आधारित ऊर्जा उत्पादन तथा अन्य औद्योगिक कार्यों में किया जा सकता है। इससे पराली का उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल संभव होता है और पर्यावरण प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिलती है।
उन्होंने बताया कि पराली को खेत में मिलाने से मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने, नमी संरक्षण तथा मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार करने में सहायता मिलती है। पराली जलाने से वायु प्रदूषण बढ़ता है, मिट्टी के लाभकारी सूक्ष्मजीव प्रभावित होते है तथा भूमि की उर्वरता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकों को अपनाना चाहिए। कृषि विभाग द्वारा किसानों को जागरूक करने के लिए किसान गोष्ठियों, जागरूकता शिविरों तथा खेत स्तर पर प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है।
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे पराली न जलाएं और सरकार द्वारा उपलब्ध करवाई जा रही प्रोत्साहन राशि तथा कृषि यंत्रों पर अनुदान संबंधी योजनाओं का लाभ उठाएं। किसान योजना की पात्रता, पंजीकरण, आवश्यक दस्तावेजों तथा अनुदान प्राप्त करने की प्रक्रिया के संबंध में अपने संबंधित कृषि विकास अधिकारी या खंड कृषि अधिकारी कार्यालय से जानकारी प्राप्त कर सकते है। पराली का उचित प्रबंधन करके किसान पर्यावरण संरक्षण, मिट्टी के स्वास्थ्य में सुधार तथा टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते है।






