संगरूर, 3 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू), लुधियाना के कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की ओर से ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत संगरूर ब्लॉक के गांव तुंगां में सरसों की खेती की उन्नत तकनीकों को लेकर प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया। शिविर के दौरान किसानों को सरसों की वैज्ञानिक तरीके से खेती करने, इसकी प्रोसेसिंग के माध्यम से उत्पादों का मूल्य बढ़ाने तथा सहायक व्यवसाय अपनाकर कृषि आय के स्रोत बढ़ाने संबंधी जानकारी दी गई।
इस अवसर पर डॉ. रुकिंदरप्रीत सिंह, सहायक प्रोफेसर (फसल विज्ञान) ने सरसों की उन्नत किस्मों और आधुनिक खेती तकनीकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राया सरसों की अधिक पैदावार प्राप्त करने के लिए इसकी बुवाई नवंबर के मध्य से पहले कर लेनी चाहिए। उन्होंने किसानों को समय पर बुवाई करने और कृषि विशेषज्ञों द्वारा सुझाई गई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. सिंह ने सरसों के बीज को जैव उर्वरक से उपचारित करने की विधि, बीज की उचित मात्रा, बुवाई के तरीकों और उर्वरकों के संतुलित इस्तेमाल के बारे में भी बताया। इसके अलावा उन्होंने खरपतवार नियंत्रण और सिंचाई प्रबंधन से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए किसानों को फसल के विभिन्न चरणों में आवश्यक देखभाल करने के लिए जागरूक किया।
कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर के प्रभारी डॉ. मनदीप सिंह ने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने तथा रबी सीजन में तिलहन और दलहनी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण के साथ-साथ कृषि उत्पादों की प्रोसेसिंग और मूल्य संवर्धन की संभावनाओं पर भी ध्यान देना जरूरी है। उन्होंने कैनोला सरसों के तेल के पौष्टिक गुणों के बारे में जानकारी साझा की और सरसों की प्रोसेसिंग के माध्यम से किसानों की आमदनी बढ़ाने की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों को खेती के साथ-साथ कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन संबंधी तकनीकी जानकारी हासिल करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
डॉ. सुनील कुमार, सहायक प्रोफेसर (फार्म मशीनरी) ने ‘खेत बचाओ अभियान’ के तहत की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने किसानों को धान की पराली को खेत में मिलाने की विभिन्न तकनीकों और इसके लिए कृषि मशीनरी के उचित इस्तेमाल के बारे में बताया। उन्होंने फसल अवशेषों के बेहतर प्रबंधन के लिए उपलब्ध आधुनिक तकनीकों को अपनाने का आह्वान किया।
शिविर में पीएयू, लुधियाना के रूरल एग्रीकल्चरल वर्क एक्सपीरियंस (RAWEP) कार्यक्रम के विद्यार्थियों ने भी भाग लिया। विद्यार्थियों ने किसानों को घरेलू सब्जी और फलदार बगीचे के महत्व के बारे में जागरूक किया तथा घर पर ताजी और सुरक्षित सब्जियां उगाने के तरीकों की जानकारी दी। इसके साथ ही उन्होंने मशरूम की खेती को सहायक व्यवसाय के रूप में अपनाने के बारे में भी बताया। विद्यार्थियों ने कहा कि घरेलू बगीचे और सहायक व्यवसायों के माध्यम से परिवार की पौष्टिक जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।
इस अवसर पर संगरूर ब्लॉक में सरसों के प्रदर्शन प्लॉट स्थापित करने के लिए किसानों को उन्नत किस्म पीएचआर-127 का बीज और जैविक खाद भी वितरित की गई। इस पहल का उद्देश्य किसानों को उन्नत किस्मों और आधुनिक खेती तकनीकों से व्यावहारिक रूप से जोड़ना तथा सरसों की खेती को प्रोत्साहित करना है।
कृषि विज्ञान केंद्र, संगरूर की ओर से ऐसे प्रशिक्षण शिविरों के माध्यम से किसानों तक कृषि की नवीनतम तकनीकों और सहायक व्यवसायों से संबंधित जानकारी पहुंचाने के निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाया जा सके।






