नाभा/भादसों, 4 नवंबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): पटियाला जिले के गांव अलोहरां के प्रगतिशील किसान हरदीप सिंह पुत्र मेजर सिंह ने पिछले 8 वर्षों से धान की पराली और गेहूं के अवशेषों को आग न लगाकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में सराहनीय मिसाल कायम की है। उनका यह प्रयास न केवल अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का स्रोत है, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश भी देता है।
किसान हरदीप सिंह लगभग 10 एकड़ भूमि पर खेती करते हैं। वे फसल अवशेषों को जलाने के बजाय खेतों में ही जोतकर मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बनाए रखने और उसकी गुणवत्ता में सुधार करने को प्राथमिकता देते हैं। उनका मानना है कि फसल अवशेषों का खेतों में उचित प्रबंधन करने से मिट्टी में जैविक पदार्थ की मात्रा बढ़ती है, जिससे भूमि की गुणवत्ता में सुधार होता है और लंबे समय में खेती की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है।
हरदीप सिंह के अनुसार, पराली और गेहूं के अवशेषों को आग लगाने से वातावरण में धुएं और प्रदूषित कणों की मात्रा बढ़ती है। इससे मानव स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचने के साथ-साथ मिट्टी में मौजूद लाभदायक सूक्ष्मजीव भी प्रभावित होते हैं। इसलिए किसानों को फसल अवशेषों को बोझ समझने के बजाय खेती के लिए उपयोगी संसाधन के रूप में इस्तेमाल करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पराली का उचित प्रबंधन समय की प्रमुख आवश्यकता है। यदि किसान फसल अवशेषों को खेतों में ही संभालें और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उचित तकनीकें अपनाएं, तो पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के साथ-साथ मिट्टी की सेहत में भी सुधार किया जा सकता है।
किसान हरदीप सिंह इस पहल को केवल अपने खेतों तक सीमित नहीं रखते, बल्कि अन्य किसानों को भी पराली न जलाने और फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने के लिए लगातार प्रेरित करते रहते हैं। उनकी इस पहल से क्षेत्र के किसानों में भी पर्यावरण अनुकूल खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाने का संदेश मिल रहा है।
पर्यावरण संरक्षण और पराली प्रबंधन के प्रति उनके प्रयासों को देखते हुए पंजाब सरकार द्वारा भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। यह सम्मान उनकी निरंतर मेहनत और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार सोच की पहचान है।
हरदीप सिंह का कहना है कि स्वच्छ वातावरण, स्वस्थ मिट्टी और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए पराली को आग न लगाना बेहद जरूरी है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे पराली प्रबंधन के उचित तरीके अपनाकर पर्यावरण संरक्षण में अपना योगदान दें, ताकि खेती को अधिक टिकाऊ और लाभदायक बनाया जा सके।






