Wednesday, November 4, 2026
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अगले पांच वर्षों में राज्य के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य – मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी

गुणवत्ता, तकनीक और निरंतर विनिर्माण पर दें जोर – राव नरबीर सिंह

गुरुग्राम , 4 नवंबर 2026 (संजीव शर्मा): हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वैश्विक बाजारों के साथ भारत का बढ़ता जुड़ाव हरियाणा के उद्योगों, एमएसएमई, किसानों और उद्यमियों के लिए नए अवसर लेकर आया है। कार्यक्रम को विशेष वीडियो संदेश के माध्यम से संबोधित करते हुए उन्होंने कारोबारियों से देश के व्यापारिक समझौतों का पूरा लाभ उठाने, नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों की तलाश करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी स्थिति मजबूत करने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा को अपने मजबूत विनिर्माण आधार और कुशल कार्यबल की क्षमता का लाभ उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अपनी उपस्थिति और अधिक बढ़ानी होगी। उन्होंने अगले पांच वर्षों में राज्य के निर्यात को दोगुना करने के लक्ष्य के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। इस दिशा में केंद्रित नीतिगत ढांचे, मजबूत संस्थागत सहयोग और उद्योग जगत के साथ निरंतर संवाद को महत्वपूर्ण बताया।

हरियाणा सरकार की ओर से गुरुग्राम में ‘लीवरेजिंग एफटीए – आउटरीच प्रोग्राम’ विषय पर राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में भारत सरकार और हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, निर्यातकों, व्यापार विशेषज्ञों तथा प्रमुख निर्यात संवर्धन परिषदों ने भाग लिया। इस कार्यशाला का आयोजन हरियाणा सरकार के एमएसएमई निदेशालय की ओर से भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग तथा विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के क्षेत्रीय कार्यालयों के सहयोग से किया गया। इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन इस कार्यक्रम का नॉलेज पार्टनर रहा।

इस राज्य स्तरीय आउटरीच कार्यक्रम का उद्देश्य हरियाणा के उद्योगों और कारोबारियों को भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स) के तहत उपलब्ध बाजार अवसरों की जानकारी देना, टैरिफ में मिलने वाली छूट और रूल्स ऑफ ओरिजिन को समझने में सहायता करना, गैर-टैरिफ बाधाओं से निपटने के लिए मार्गदर्शन प्रदान करना तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में प्रतिस्पर्धा के लिए उनकी तैयारी को मजबूत करना था।

हरियाणा के उत्पाद आज 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं

वित्त वर्ष 2025-26 में 20.57 अरब अमेरिकी डॉलर के वस्तु निर्यात, 7.66 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि दर और देश के कुल वस्तु निर्यात में 4.66 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ हरियाणा भारत के प्रमुख निर्यातक राज्यों में अपनी मजबूत स्थिति बनाए हुए है। देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छठे स्थान पर रहने वाले हरियाणा के उत्पाद आज 200 से अधिक देशों और क्षेत्रों तक पहुंच रहे हैं। राज्य अब भारत के बढ़ते मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से उपलब्ध अवसरों को अपने उद्योगों और निर्यातकों के लिए वास्तविक व्यावसायिक संभावनाओं में बदलने की दिशा में प्रयास तेज कर रहा है।

गुणवत्ता, तकनीक और निरंतर विनिर्माण पर दें जोर – राव नरबीर सिंह

उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री श्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि आज वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलता केवल कीमतों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि उत्पाद की गुणवत्ता, तकनीक, उत्पादकता और निरंतर विनिर्माण प्रक्रियाएं भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने उद्योगों से बदलते वैश्विक मानकों, पर्यावरण संबंधी आवश्यकताओं, जिम्मेदार सोर्सिंग और संसाधनों के कुशल उपयोग के अनुरूप स्वयं को तैयार करने तथा मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से उपलब्ध वैश्विक बाजार अवसरों का पूरा लाभ उठाने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि ऑटोमोबाइल, ऑटो कंपोनेंट्स, इंजीनियरिंग, टेक्सटाइल एवं परिधान, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, फुटवियर और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में हरियाणा की मजबूत औद्योगिक क्षमता राज्य को वैश्विक मूल्य श्रृंखला (ग्लोबल वैल्यू चेन) में अपनी भागीदारी और बढ़ाने का अवसर प्रदान करती है।

गुरुग्राम से ही लगभग 8.33 अरब अमेरिकी डॉलर की वस्तुओं का होता है निर्यात – डॉ. अमित अग्रवाल

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने हरियाणा के बढ़ते निर्यात इकोसिस्टम और राज्य की औद्योगिक क्षमता को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि गुरुग्राम से ही लगभग 8.33 अरब अमेरिकी डॉलर का वस्तु निर्यात होता है, जो राज्य के कुल वस्तु निर्यात का करीब 40 प्रतिशत है। गुरुग्राम का मजबूत विनिर्माण, इंजीनियरिंग, आईटी/आईटीईएस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर (जीसीसी) का इकोसिस्टम इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार एमएसएमई निदेशालय में समर्पित मार्केट डेवलपमेंट एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन सेल के माध्यम से निर्यातकों को संस्थागत सहयोग प्रदान कर रही है। इसके साथ ही हरियाणा प्रोग्रेसिव एमएसएमई एंड एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी 2026 तथा रैंप कार्यक्रम के तहत संचालित जीआईएफटी सेल जैसी पहल भी राज्य के निर्यात इकोसिस्टम को मजबूत कर रही हैं।

एमएसएमई निदेशालय के महानिदेशक डॉ. यश गर्ग ने निर्यात संवर्धन के लिए राज्य सरकार के नीतिगत दृष्टिकोण की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि निर्यातकों को वित्तीय सहायता, गुणवत्ता प्रमाणन, माल ढुलाई सहायता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी, डिजिटल बाजार संपर्क और निर्यात संबंधी सुविधाओं सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग दिया जा रहा है। उन्होंने जिला और औद्योगिक क्लस्टर स्तर तक बाजार संबंधी जानकारी, तकनीकी मार्गदर्शन तथा क्षमता निर्माण से जुड़ी सुविधाएं पहुंचाने पर भी जोर दिया।

हरियाणा के उद्योगों को वैश्विक व्यापार से जोड़ने की पहल

तकनीकी सत्रों में भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रमुख व्यापारिक संस्थाओं के विशेषज्ञों ने भारत के मुक्त व्यापार समझौतों का लाभ उठाने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर जानकारी साझा की। भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग में तैनात अतिरिक्त सचिव श्री नितिन कुमार यादव, आईएएस ने मुक्त व्यापार समझौतों के तहत उभरते अवसरों और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की जानकारी देते हुए सत्र की पृष्ठभूमि प्रस्तुत की।

इंडिया ट्रेड प्रमोशन ऑर्गनाइजेशन की ट्रेड एडवाइजर डॉ. तमन्ना चतुर्वेदी ने हरियाणा के निर्यातकों के लिए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय बाजारों में क्षेत्रवार उपलब्ध अवसरों पर प्रकाश डाला।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के उप महानिदेशक श्री कम्बले प्रकाश सत्यवान ने गैर-टैरिफ उपायों और उनसे निपटने के तरीकों की जानकारी दी। वहीं, ट्रेड कनेक्ट ई-प्लेटफॉर्म पर आयोजित विशेष सत्र में निर्यातकों को उपलब्ध डिजिटल टूल्स और संसाधनों से परिचित करवाया गया। डीजीएफटी के संयुक्त महानिदेशक श्री आनंद मोहन मिश्रा ने निर्यात प्रक्रियाओं और भारत सरकार की प्रमुख पहलों, जिनमें एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन (ईपीएम), डिस्ट्रिक्ट्स एज एक्सपोर्ट हब्स (डीईएच) तथा विदेश व्यापार नीति शामिल हैं, के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।

प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित सत्र और निर्यातकों के साथ सीधा संवाद

कार्यशाला में तीन प्रमुख क्षेत्रीय समूहों पर विशेष सत्र आयोजित किए गए। इनमें टेक्सटाइल एवं परिधान (जिसमें चमड़ा और फुटवियर शामिल हैं), कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण तथा इंजीनियरिंग उत्पाद (जिसमें ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स शामिल हैं) प्रमुख रहे। इन सत्रों में संबंधित निर्यात संवर्धन परिषदों और औद्योगिक संगठनों ने भाग लिया। इनमें एईपीसी, टेक्सप्रोसिल, आईआईएफटी, एसीएमए सहित अन्य संस्थाएं शामिल थीं।

कार्यक्रम का समापन ओपन हाउस सत्र के साथ हुआ, जिसमें निर्यातकों और औद्योगिक संगठनों को सरकारी अधिकारियों तथा क्षेत्रीय विशेषज्ञों के साथ सीधे बातचीत करने, अपनी व्यावहारिक समस्याएं रखने और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बनाने के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

हरियाणा के निर्यात विकास को नई गति देने का सामूहिक प्रयास

मजबूत औद्योगिक क्लस्टरों, स्थापित विनिर्माण इकोसिस्टम और तेजी से विकसित हो रही सेवा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के साथ हरियाणा भारत की बढ़ती वैश्विक व्यापारिक साझेदारियों का लाभ उठाने की मजबूत स्थिति में है। राज्य का ध्यान अब इन अवसरों को बेहतर बाजार पहुंच, वैश्विक मूल्य श्रृंखला में मजबूत भागीदारी और प्रदेश के अधिक से अधिक उद्यमों को निर्यात गतिविधियों में शामिल करने में बदलने पर केंद्रित है।

अपनी नीतिगत पहलों, संस्थागत ढांचे तथा केंद्र सरकार, निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग जगत के साथ निरंतर सहयोग के माध्यम से हरियाणा सरकार प्रदेश के कारोबारियों के लिए वैश्विक बाजारों तक पहुंच को और अधिक सुगम बनाने तथा भारत के निर्यात विकास में राज्य की भूमिका को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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