संगरूर, 6 नवंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह) : जिला संगरूर में शोर-शराबे और प्रदूषण के कारण आम लोगों के मानसिक स्वास्थ्य तथा बच्चों की सेहत पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के अलावा, अनधिकृत रूप से चलाए जा रहे लाउडस्पीकरों से उत्पन्न होने वाली संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को ध्यान में रखते हुए जिला मजिस्ट्रेट संगरूर पूनमदीप कौर ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्राप्त अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जिले में लाउडस्पीकर, ऑर्केस्ट्रा और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले अन्य उपकरणों के इस्तेमाल संबंधी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए हैं। इन आदेशों में कहा गया है कि मैरिज पैलेसों और अन्य स्थानों पर, जहां शादियां आदि आयोजित की जाती हैं, वहां देर रात तक ऑर्केस्ट्रा और ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। इसके अलावा आम लोगों द्वारा भी धार्मिक और अन्य स्थानों पर खुले तौर पर लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल किया जाता है, जिसके कारण बुजुर्गों, बीमार व्यक्तियों और पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। आदेशों में कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति ध्वनि प्रदूषण (रेगुलेशन एंड कंट्रोल) रूल्स, 2000 में दर्ज प्रावधानों के अनुसार सक्षम अधिकारी की लिखित मंजूरी के बिना ऐसे किसी भी उपकरण या ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली सामग्री, जैसे प्रेशर हॉर्न आदि का इस्तेमाल नहीं करेगा, जिसकी आवाज उसकी निर्धारित सीमा से बाहर सुनाई देती हो। हालांकि, ये आदेश सरकारी उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले लाउडस्पीकरों पर लागू नहीं होंगे। आदेशों के अनुसार मैरिज पैलेसों और धार्मिक स्थलों पर ऑर्केस्ट्रा, बैंड, डी.जे. सिस्टम तथा लाउडस्पीकरों के इस्तेमाल पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पूरी तरह प्रतिबंध रहेगा। एम्पलीफायर का इस्तेमाल करने वाली बारातों पर भी रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। विवाह वाले घरों में लाउडस्पीकरों की आवाज घर से बाहर नहीं जानी चाहिए। इसी तरह मैरिज पैलेसों में लाउडस्पीकरों की आवाज परिसर से बाहर नहीं सुनाई देनी चाहिए। आदेशों में कहा गया है कि इन नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित ऑर्केस्ट्रा, डी.जे. और मैरिज पैलेस आदि के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऑर्केस्ट्रा आदि के इस्तेमाल पर रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक प्रतिबंध रहेगा। ये आदेश 21 दिसंबर 2026 तक लागू रहेंगे।






