नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026 (छत्रपाल सिंह): सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने 24 घंटे के भीतर पेश करने की संवैधानिक समय सीमा पुलिस द्वारा हिरासत में लेने के समय से शुरू होगी, न कि औपचारिक गिरफ्तारी दर्ज करने के समय से। जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस अतुल एस. चंदूरकर की पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 22(2) के तहत हिरासत और गिरफ्तारी में कृत्रिम अंतर नहीं किया जा सकता।
यह फैसला एनडीपीएस एक्ट के मामले में चार आरोपियों की अपील पर आया। जांच एजेंसी ने आरोपियों को 29 सितंबर 2025 को दोपहर 2:30 बजे हिरासत में लिया था। उनके कब्जे से कथित तौर पर 11.03 किलोग्राम मेथामफेटामाइन गोलियां बरामद हुई थीं। हालांकि, औपचारिक गिरफ्तारी 30 सितंबर को सुबह 11:15 बजे दर्ज की गई और उसी दिन शाम 4:45 बजे मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
पीठ ने हिरासत और औपचारिक गिरफ्तारी के बीच 18 घंटे की देरी का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं देने पर जांच एजेंसी से सवाल किए। अदालत ने कहा कि पूछताछ, तलाशी और जब्ती में लगा समय भी 24 घंटे की गणना में शामिल होगा। केवल मजिस्ट्रेट की अदालत तक पहुंचने में उचित रूप से आवश्यक यात्रा समय को इससे बाहर रखा जा सकता है।






