चंडीगढ़, 30 जुलाई, 2026 (दीपक दत्ता): देश का कोई भी राज्य इस समय कर्ज के बोझ से पूरी तरह अछूता नहीं है। राज्यों की वित्तीय स्थिति पर नजर डालें तो कर्ज लेने के मामले में तमिलनाडु सबसे आगे है, जबकि पंजाब कर्ज के मामले में देश में 12वें स्थान पर पहुंच गया है। मार्च 2026 तक पंजाब पर करीब 4.13 लाख करोड़ रुपये का कर्ज दर्ज किया गया है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु पर सबसे अधिक 10.42 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। इसके बाद महाराष्ट्र 9.37 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के साथ दूसरे स्थान पर है। उत्तर प्रदेश पर 8.83 लाख करोड़ और कर्नाटक पर 8.14 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। पंजाब की तुलना में बिहार पर 4.03 लाख करोड़ रुपये और पड़ोसी राज्य हरियाणा पर 4.02 लाख करोड़ रुपये का कर्ज है। वहीं देश में सबसे कम कर्ज मिजोरम पर है, जहां यह आंकड़ा 14,516 करोड़ रुपये है।
पिछले दो वर्षों में पंजाब ने करीब 67 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज लिया है, जबकि हरियाणा ने लगभग 63 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त कर्ज लिया है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2022 में पंजाब पर कुल कर्ज 2.82 लाख करोड़ रुपये से अधिक था, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 4.13 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
भारतीय रिजर्व बैंक के संकेतक कैलेंडर के अनुसार, पंजाब सरकार चालू वित्त वर्ष की जुलाई-सितंबर तिमाही में करीब 13,900 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना बना रही है। वहीं पूरे वित्त वर्ष में राज्य सरकार बाजार उधारी के माध्यम से करीब 43,798 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी वर्षों में राज्यों की उधारी की रफ्तार अक्सर बढ़ जाती है। पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए सरकार विकास कार्यों को गति देने के लिए बाजार से ऋण जुटा रही है।
दूसरी तिमाही में देश के राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा कुल 3.18 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना है, जिसमें पंजाब की हिस्सेदारी करीब 4.35 प्रतिशत है। पड़ोसी राज्यों में हरियाणा 19 हजार करोड़, राजस्थान 15 हजार करोड़, बिहार 14 हजार करोड़ और गुजरात 12,500 करोड़ रुपये का कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा का कहना है कि राज्य सरकार सीमित दायरे में कर्ज ले रही है और यह मुख्य रूप से पिछली सरकारों से मिले कर्ज को चुकाने तथा विकास कार्यों को जारी रखने के लिए लिया जा रहा है।






