Thursday, August 27, 2026
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अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व की भावना होना बेहद जरूरी – डॉ. अग्रवाल

1अगस्त,2026 (संजीव सिंगला): हरियाणा निवास, चंडीगढ़ में आयोजित एक कार्यक्रम में सूचना, जनसंपर्क, भाषा एवं संस्कृति विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने प्रसिद्ध लेखिका डॉ. शमीम शर्मा और उनकी बहू डॉ. सरिता शर्मा द्वारा संयुक्त रूप से लिखित पुस्तक ‘एक बूंद सौ सवाल’ का विमोचन किया और दोनों लेखिकाओं को इस अनूठी कृति के लिए बधाई दी।

डॉ. अग्रवाल ने पुस्तक की सराहना करते हुए कहा कि इसमें पानी से जुड़े ऐतिहासिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक और पर्यावरणीय पहलुओं को बेहद सरल और सुंदर शैली में प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने कहा कि यह पुस्तक हर आयु वर्ग के पाठकों के लिए उपयोगी और प्रेरणादायक है। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक से प्रेरणा लेते हुए उन्होंने हाल ही में उद्योग विभाग की बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अब राज्य में किसी भी नए औद्योगिक प्रोजेक्ट या पार्क को मंजूरी देने से पहले पानी की उपलब्धता और उसकी व्यवहारिकता का आकलन करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही औद्योगिक इकाइयों के लिए जल संरक्षण को भी आवश्यक बनाया जाएगा, ताकि भूजल के अत्यधिक दोहन को रोका जा सके। डॉ. अग्रवाल ने कहा कि हरियाणा एक अर्ध-शुष्क प्रदेश है, जहां पानी का सांस्कृतिक और वैज्ञानिक महत्व हमेशा से रहा है। हमारी पुरानी परंपराओं जैसे कुआं-पूजन और स्वच्छता से जुड़े नियमों को धर्म से इसलिए जोड़ा गया था, ताकि लोग जल को प्रदूषित न करें और जलजनित बीमारियों से सुरक्षित रहें।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं की भाषा के प्रति जुड़ाव में कमी आई है। अपनी मातृभाषा के प्रति गर्व की भावना होना आवश्यक है। हिंदी देश को जोड़ने वाली प्रमुख भाषा है और इसके संरक्षण के लिए ‘एक बूंद सौ सवाल’ जैसी सरल, मानक और व्यावहारिक पुस्तकों का अधिक से अधिक प्रकाशन होना चाहिए।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दैनिक ट्रिब्यून के संपादक श्री नरेश कौशल ने कहा कि साहित्य केवल अभिव्यक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त साधन है। उन्होंने कहा कि कहानी, कविता, व्यंग्य, आत्मकथा, महिला विमर्श और हरियाणवी हास्य साहित्य सहित विभिन्न विधाओं में डॉ. शमीम शर्मा ने अपनी अलग पहचान बनाई है। उनकी लेखनी ने नारी अस्मिता, भ्रूण हत्या, सामाजिक कुरीतियों, ग्रामीण जीवन, पारिवारिक संबंधों और मानवीय मूल्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है। हरियाणवी भाषा को साहित्यिक पहचान दिलाने में उनका योगदान उल्लेखनीय है।

इस अवसर पर हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, पंचकूला के उर्दू सेल के निदेशक ने विशेष अतिथि के रूप में भाग लिया। उन्होंने दोनों लेखिकाओं को बधाई देते हुए कहा कि जल जैसे महत्वपूर्ण विषय पर पुस्तक लिखना सराहनीय प्रयास है। पुस्तक की लेखिका डॉ. शमीम शर्मा ने बताया कि ‘एक बूंद सौ सवाल’ में जल संरक्षण से जुड़े 49 अध्याय शामिल हैं। उन्होंने कहा कि पानी बचाना आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए इस पुस्तक की रचना की गई है।

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