श्री किशोर कुमार का जन्म 04 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खण्डवा शहर में वहाँ के जाने माने वकील श्री कुंजीलाल जी के यहाँ हुआ था। किशोर कुमार का मूल नाम आभास कुमार गांगुली था। किशोर कुमार चार भाई बहनों में चौथे नम्बर पर थे।
4 अगस्त,2026(शहीद-ए-आज़म): भारतीय संगीत की दुनिया में कई महान गायक हुए, लेकिन किशोर कुमार की पहचान सबसे अलग रही। उन्होंने शास्त्रीय संगीत की परंपरागत सीमाओं में बंधे बिना अपनी अनोखी आवाज, भावनाओं और अंदाज से करोड़ों दिलों को छुआ। उनकी आवाज में ऐसी मिठास थी कि उनके गाए गीत आज भी उतने ही लोकप्रिय हैं जितने उनके दौर में थे।
“आए तुम याद मुझे”, “आ चल के तुझे मैं लेके चलूं” और “ओ साथी रे” जैसे गीतों ने साबित किया कि संगीत सिर्फ सुरों का नहीं, बल्कि एहसासों का भी नाम है। किशोर कुमार सिर्फ गायक ही नहीं थे, बल्कि अभिनेता, संगीत निर्देशक, गीतकार, लेखक और निर्माता के रूप में भी उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा दिखाई।
4 अगस्त 1929 को मध्य प्रदेश के खंडवा में आभास कुमार गांगुली के रूप में जन्मे किशोर कुमार बचपन से ही संगीत के प्रति आकर्षित थे। बड़े भाई अशोक कुमार के जरिए उनका फिल्मी दुनिया से जुड़ाव हुआ और धीरे-धीरे उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
फिल्म “जिद्दी” के गीत से उन्हें बतौर सोलो गायक पहचान मिली और इसके बाद उनकी आवाज देव आनंद समेत कई बड़े सितारों की पहचान बन गई। किशोर दा ने कठिन से कठिन गीतों को भी अपने सहज और भावपूर्ण अंदाज में गाकर आम लोगों तक पहुंचाया।
किशोर कुमार की सबसे बड़ी खासियत थी कि वह हर गीत में अपनी आत्मा डाल देते थे। उनकी आवाज में खुशी, दर्द, प्यार और जिंदगी के हर रंग की झलक मिलती थी। यही वजह है कि दशकों बाद भी किशोर दा के गीत लोगों की धड़कनों में बसे हुए हैं।






