6 अगस्त,2026 (छत्रपाल सिंह): पंजाब विधानसभा में बुधवार को रोजगार और सरकारी भर्तियों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने पिछले साढ़े चार वर्षों में 68 हजार से अधिक सरकारी नौकरियां पारदर्शी तरीके से देने का दावा किया, जबकि विपक्ष ने इन भर्तियों का श्वेत पत्र जारी करने की मांग उठाई। विपक्ष का कहना था कि इससे यह स्पष्ट होगा कि सरकारी नौकरियां पाने वालों में पंजाब के मूल निवासियों की संख्या कितनी है। साथ ही सरकारी नौकरियों में डोमिसाइल नीति लागू करने की मांग भी की गई।
सरकार की ओर से पेश प्रस्ताव में बताया गया कि विभिन्न विभागों में कुल 68,228 नियुक्तियां की गई हैं। इनमें शिक्षा, गृह, बिजली, स्थानीय निकाय और स्वास्थ्य विभाग प्रमुख रहे। सरकार ने यह भी दावा किया कि राज्य में करीब 1.84 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिनसे छह लाख से अधिक रोजगार के अवसर बनने की संभावना है।
विपक्ष के नेताओं ने आरोप लगाया कि दूसरे राज्यों के युवाओं को पंजाब में सरकारी नौकरियां मिल रही हैं, जबकि राज्य के युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। कांग्रेस ने मांग की कि सरकार सभी भर्तियों का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक करे। कुछ विधायकों ने यह भी कहा कि सरकारी सेवाओं में केवल उन्हीं युवाओं को अवसर मिले जिन्होंने पंजाब में शिक्षा प्राप्त की हो।
बहस के दौरान सत्ता और विपक्ष के कई नेताओं के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने पिछली सरकारों पर रिश्तेदारों को सरकारी नौकरियां दिलाने के आरोप लगाए और कहा कि वर्तमान सरकार ने सिफारिश और पक्षपात की परंपरा समाप्त कर दी है। वहीं उद्योग एवं रोजगार से जुड़े मामलों पर सरकार ने निवेश और रोजगार सृजन को अपनी बड़ी उपलब्धि बताया।
इसी दौरान शून्यकाल में श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक को लेकर भी सदन का माहौल गर्मा गया। अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया ने सरकार से अकाल तख्त के निर्देशों को लेकर सवाल उठाए, जिसके बाद सत्ता और विपक्ष के सदस्य आमने-सामने आ गए। हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दो बार बाधित हुई। बाद में वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार अकाल तख्त के निर्देशों का सम्मान करते हुए विधेयक में आवश्यक बदलाव की प्रक्रिया का पालन कर रही है।






