11अगस्त,2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): पंजाब में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है। अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ के नेता और मुल्लांपुर दाखा से विधायक मनप्रीत सिंह इयाली ने कहा है कि जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों को इसकी राजनीतिक कीमत नहीं चुकानी चाहिए। उन्होंने राज्यसभा में सभी राज्यों को समान प्रतिनिधित्व देने के लिए संविधान में संशोधन की मांग की है।
पंजाब विधानसभा में मुद्दा उठाते हुए इयाली ने कहा कि यदि लोकसभा सीटों का पुनर्विन्यास जनसंख्या के आधार पर किया जाता है, तो अधिक आबादी वाले राज्यों की राजनीतिक ताकत बढ़ सकती है। ऐसे में छोटे राज्यों के हितों की सुरक्षा के लिए राज्यसभा में समान प्रतिनिधित्व का प्रावधान जरूरी है।
इयाली ने पंजाब सरकार से विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से संवैधानिक संशोधन की मांग करने की अपील की। उनका कहना है कि ऊपरी सदन में राज्यों को बराबर प्रतिनिधित्व मिलने से संघीय व्यवस्था में संतुलन बना रहेगा और बड़े राज्यों का छोटे राज्यों पर राजनीतिक प्रभाव हावी नहीं होगा।
उन्होंने मौजूदा स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि राज्यसभा में पंजाब के पास सात सीटें हैं, जबकि उत्तर प्रदेश के पास 31 सीटें हैं। परिसीमन के बाद यदि जनसंख्या के आधार पर प्रतिनिधित्व में बदलाव होता है, तो बड़े राज्यों की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है। इससे छोटे राज्यों की राजनीतिक आवाज अपेक्षाकृत कमजोर होने की आशंका है।
विधायक ने अमेरिका, स्विट्जरलैंड और ऑस्ट्रेलिया के संघीय मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि इन देशों के ऊपरी सदनों में संघीय इकाइयों को अपेक्षाकृत समान प्रतिनिधित्व दिया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में भी राज्यों के अधिकारों और संघीय संतुलन को मजबूत करने के लिए इसी तरह की व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए।
इयाली के मुताबिक, अकाली दल ‘वारिस पंजाब दे’ लंबे समय से राज्यों को अधिक अधिकार देने और मजबूत संघीय ढांचे की मांग करता रहा है। उनके अनुसार, राज्यसभा में समान प्रतिनिधित्व से छोटे राज्यों को राष्ट्रीय स्तर पर अपने मुद्दे अधिक प्रभावी ढंग से उठाने का अवसर मिलेगा।
इस बीच, शिरोमणि अकाली दल (बादल) ने भी हाल में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े मुद्दे पर केंद्र से कदम उठाने की मांग की है। पार्टी ने राज्यों के बीच सीटों के संतुलित और न्यायसंगत विस्तार पर जोर दिया है।






