नई दिल्ली, 27 अगस्त,2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जर्मनी में फेडरल कोर्ट ऑफ जस्टिस के अध्यक्ष न्यायाधीश उलरिख हर्मन से मुलाकात के दौरान अदालतों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.) के इस्तेमाल को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
उन्होंने बताया कि भारतीय अदालतों में ए. आई. का उपयोग फिलहाल कानूनी जानकारी खोजने, फैसलों का 16 भाषाओं में अनुवाद करने और केस की स्थिति से जुड़ी जानकारी देने जैसे प्रशासनिक कार्यों तक सीमित है। ए.आई. को न्यायिक फैसले लेने की अनुमति नहीं है।
सी.जे.आई. ने कहा कि ए.आई. जजों की सोच-विचार प्रक्रिया में मदद कर सकती है, लेकिन गवाह की विश्वसनीयता, जमानत जैसे संवेदनशील मामलों में फैसला केवल अधिकृत न्यायाधीश ही करेंगे।
उन्होंने भारत और जर्मनी के बीच इस बात पर समानता जताई कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद न्यायिक निर्णय इंसानी विवेक और कानून के आधार पर ही लिए जाने चाहिए।
सूर्यकांत ने अदालतों को अधिक सुलभ, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि मध्यस्थता और लोक अदालतों के माध्यम से मामलों का जल्द निपटारा आम लोगों को न्याय के करीब लाने में अहम भूमिका निभा रहा है।






