हरियाणा, 7 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): भारत की प्राचीन गुरु-शिष्य परंपरा आज भी शिक्षा और संस्कारों के क्षेत्र में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए है। यह बात मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डॉ. श्री प्रकाश मिश्रा ने शिक्षक दिवस के अवसर पर मातृभूमि शिक्षा मंदिर की ओर से आयोजित ‘ज्ञान संवाद’ कार्यक्रम में कही।
कार्यक्रम का शुभारंभ पूर्व राष्ट्रपति एवं महान शिक्षाविद् डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर शिक्षकों के योगदान और शिक्षा के माध्यम से समाज निर्माण पर विशेष रूप से चर्चा की गई।
डॉ. मिश्रा ने कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने तक सीमित नहीं होता, बल्कि वह उनके व्यक्तित्व और चरित्र का निर्माण भी करता है। उन्होंने शिक्षक की भूमिका की तुलना एक माली से करते हुए कहा कि जिस प्रकार माली पौधों की देखभाल कर उन्हें विकसित करता है, उसी तरह शिक्षक विद्यार्थियों के भीतर संस्कार, ज्ञान और जिम्मेदारी की भावना विकसित कर उन्हें देश के आदर्श नागरिक बनने के लिए तैयार करता है।
उन्होंने कहा कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन का भारतीय शिक्षा व्यवस्था और राष्ट्र निर्माण में योगदान सदैव प्रेरणादायक रहेगा। उनके विचार आज भी शिक्षकों और विद्यार्थियों के लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं।
समाजसेवी अबल सिंह राणा ने कहा कि मातृभूमि सेवा मिशन आर्थिक रूप से जरूरतमंद बच्चों तक शिक्षा की रोशनी पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से वंचित वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
कार्यक्रम के दौरान शिक्षा, संस्कार और गुरु-शिष्य संबंधों के महत्व पर विचार साझा किए गए तथा शिक्षकों के योगदान को सम्मानपूर्वक याद किया गया।






