कुरुक्षेत्र, 10 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा):उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि इस बार सरकार और जिला प्रशासन पराली जलाने वालों पर बेहद सख्त कार्रवाई करने जा रहा है। जो भी किसान खेतों में पराली में आग लगाता हुआ पकड़ा गया, उस पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। फसल अवशेष में आग लगाने वाले किसानों की पोर्टल पर रेड एंट्री दर्ज की जाएगी। इतना ही नहीं नियमानुसार एफआईआर भी दर्ज की जाएगी और दोषी किसानों पर 5 हजार से लेकर 10 हजार रुपए तक जुर्माना भी लगाया जाएगा।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने जिला के सभी किसानों से अपील करते हुए कहा कि कोई भी किसान भाई धान की कटाई के बाद बचे हुए फसल अवशेष (पराली) में आग न लगाएं। पराली जलाना न केवल पर्यावरण के लिए हानिकारक है, बल्कि यह कानूनन अपराध भी है। प्रशासन द्वारा सैटेलाइट मैपिंग, जिला स्तर पर गठित टीमों और गांव स्तर पर पटवारी, ग्राम सचिव और नंबरदारों के माध्यम से पराली जलाने की घटनाओं पर कड़ी नजर रखी जा रही है। प्रशासन द्वारा फसल अवशेष जलाने पर जुर्माने की राशि निर्धारित की गई है। यदि कोई किसान 2 एकड़ से कम क्षेत्र में पराली जलाता है तो उस पर 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि 2 से 5 एकड़ तक के क्षेत्र में आग लगाई जाती है तो 10 हजार रुपए जुर्माना देना होगा और यदि 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में पराली जलाई जाती है तो 15 हजार रुपए तक का जुर्माना वसूला जाएगा।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने कहा कि जुर्माना ही एकमात्र सजा नहीं होगी। पराली जलाने वाले किसान की मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर रेड एंट्री की जाएगी और उसके खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की जाएगी। इतना ही नहीं ऐसे किसान को 2 साल के लिए पोर्टल पर बैन कर दिया जाएगा, जिससे वह सरकार की सभी कृषि योजनाओं जैसे फसल बिक्री, भावांतर भरपाई, सब्सिडी और अन्य अनुदानों के लाभ से वंचित रह जाएगा। पराली जलाने से जमीन की उर्वरा शक्ति नष्ट होती है, जमीन में मौजूद मित्र कीट मर जाते हैं और वायु प्रदूषण का स्तर खतरनाक रूप से बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट और एनजीटी के सख्त निर्देश भी हैं कि पराली जलाने पर रोक लगाई जाए।
उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि वे पराली को आग लगाने की बजाय उसका सही प्रबंधन करें। सरकार पराली प्रबंधन के लिए किसानों को कई विकल्प और सब्सिडी दे रही है। किसान सुपर सीडर, हैप्पी सीडर, जीरो टिलेज मशीन, बेलर, श्रेडर जैसे कृषि यंत्रों का उपयोग कर सकते हैं। इन यंत्रों पर सरकार 50 से 80 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। इसके अलावा किसान पराली को बायो-डी कंपोजर से खाद में बदल सकते हैं या उसे बेचकर भी आमदनी कमा सकते हैं। जिला में कई गौशालाएं और बायोमास प्लांट भी पराली खरीद रहे है।
उपायुक्त विश्राम कुमार मीणा ने सभी एसडीएम, तहसीलदार, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारियों और कृषि विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्र में किसानों को लगातार जागरूक करें और जहां भी पराली जलाने की घटना सामने आए, वहां तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य किसानों को परेशान करना नहीं, बल्कि उन्हें जागरूक करना है। सभी किसान भाई जिम्मेदार नागरिक होने का परिचय दें और पर्यावरण को बचाने में सहयोग करें। इसलिए सभी किसान भाई विशेष ध्यान रखें और पराली को बिल्कुल भी न जलाएं।






