Tuesday, September 29, 2026
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हरियाणा में लम्पी स्किन बीमारी का फैलाव, 9,480 गोवंश प्रभावित; 70 की मौत, 950 का इलाज जारी

चंडीगढ़, 18 सितंबर, 2026 (छत्रपाल सिंह): हरियाणा में गोवंश में लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी) के मामले सामने आने के बाद पशुपालन विभाग ने निगरानी और रोकथाम तेज कर दी है। ताजा विभागीय आंकड़ों के अनुसार अब तक 9,480 गोवंश इस बीमारी से प्रभावित हुए हैं। इनमें से 8,530 पशु ठीक हो चुके हैं, जबकि 950 का इलाज जारी है। बीमारी से अब तक 70 पशुओं की मौत की रिपोर्ट है।

पशुपालन एवं डेयरी विभाग के निदेशक डॉ. प्रेम सिंह के अनुसार मरने वाले पशुओं में पहले से बीमार पशु, दुर्घटनाग्रस्त पशु और चार महीने से कम उम्र के पशु शामिल थे। लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय (लुवास), हिसार द्वारा जांचे गए लगभग 300 नमूने नेगेटिव आए हैं, जबकि 17 संदिग्ध नमूने भोपाल स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हाई सिक्योरिटी एनिमल डिजीज (निषाद) को भेजे गए हैं और उनकी अंतिम रिपोर्ट का इंतजार है।

ध्यान देने योग्य है कि 31 अगस्त को हरियाणा सरकार ने विधानसभा में बताया था कि उस समय तक राज्य में लम्पी बीमारी का कोई पुष्ट मामला नहीं था। उस समय 1,356 संदिग्ध केस दर्ज हुए थे और 25 जुलाई से 30 अगस्त तक चार महीने से अधिक उम्र के योग्य स्वस्थ गोवंश के लिए गोट पॉक्स वैक्सीन का अभियान चलाया गया था। बाद में स्थिति बदलने से अब पुष्ट मामलों और इलाज संबंधी नए आंकड़े सामने आए हैं।

केंद्र सरकार के पशुपालन विभाग ने भी जुलाई 2026 से हरियाणा सहित कई राज्यों में एलएसडी के छिटपुट मामलों की पुष्टि की है। विभाग ने टीकाकरण, प्रभावित पशुओं को अलग रखने, आवाजाही पर नियंत्रण, कीट-नियंत्रण, सैनिटेशन और नए पशुओं को क्वारंटाइन करने पर जोर दिया है। एलएसडी एक वायरल बीमारी है जो मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और चिचड़ी जैसे कीटों के माध्यम से फैलती है।

हरियाणा में बीमारी के फैलाव को रोकने के लिए पशु मेलों और अंतरराज्यीय पशु आवाजाही पर रोक जैसे कदम भी लागू किए गए हैं। पशुपालकों को बीमार पशु तुरंत स्वस्थ पशुओं से अलग करने, शेडों में सफाई और कीटनाशक प्रबंध करने तथा मृत पशुओं के शरीर का वैज्ञानिक तरीके से निपटारा करने की हिदायत दी गई है। नए पशु को झुंड में शामिल करने से पहले 15 दिन क्वारंटाइन करने की सलाह भी दी गई है।

बीमारी के मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, शरीर पर गोल गांठें/घाव, आंखों-नाक से पानी बहना, भूख कम होना, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी शामिल हैं। केंद्र के अनुसार बीमारी आमतौर पर कम मृत्यु दर वाली है, लेकिन छोटी उम्र या पहले से बीमार पशुओं में खतरा अधिक हो सकता है।

हरियाणा सरकार द्वारा पशुपालन विभाग के 1,000 पशु अस्पतालों और 1,800 डिस्पेंसरियों के डॉक्टरों व फील्ड स्टाफ को निगरानी और इलाज के लिए तैनात किए जाने की जानकारी दी गई है। पशुपालक सहायता के लिए 1962 टोल-फ्री हेल्पलाइन से संपर्क कर सकते हैं।

17 सितंबर की एक रिपोर्ट में प्रभावित पशुओं की संख्या 7,577 बताई गई थी, जबकि 18 सितंबर की ताजा रिपोर्ट में पशुपालन विभाग के हवाले से 9,480 का आंकड़ा दिया गया है। इससे लगता है कि आंकड़े नई रिपोर्टिंग के साथ अपडेट हुए हैं।

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