कुरुक्षेत्र, 19 सिंतबर, 2026 (संजीव शर्मा): चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र (केविके) द्वारा गांव सुनहेड़ी खालसा के किसानों के लिए फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर 5 दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार के कुलपति प्रो. बी. आर. काम्बोज के मार्गदर्शन और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ नरेश कौशिक के दिशा निर्देश कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा 15 से 19 सितंबर, 2026 तक किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र के समन्वयक डॉ बलजीत सिंह सहारण की अगुवाई में सुनहेड़ी खालसा गाँव के 25 किसानों को फ़सल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर उनका उचित प्रबंधन करने के लिए प्रशिक्षित किया गया ताकि उनके माध्यम से जिले के ज़्यादा से ज़्यादा किसानों को जागरूक किया जा सके। उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों के लिए चलाए जा रहे कार्यकलापों के बारे में बताया। उन्होंने किसानों को डिकंपोजर के प्रयोग से जैविक तरीकों से पराली गलाकर खेत में ही मिलाने के बारे में जानकारी दी।
वैज्ञानिक डॉ सरिता रानी (सस्य विज्ञान) ने किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान तथा अवशेष का उचित प्रबंधन करने से होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से बताया। केंद्र के वैज्ञानिक डॉ अश्वनी कुमार (पौध रोग विज्ञान) ने फसलों में लगने वाली बीमारियों की पहचान तथा उपचार के बारे में किसानों को जानकारी दी। डॉ फतेह सिंह (पौध रोग विज्ञान) ने फसल अवशेष को खुम्ब उत्पादन के लिए प्रयोग करने के बारे में बताया। डॉ कविता (मृदा विज्ञान) ने फसल अवशेष को खेत में मिलाने से मिट्टी के स्वास्थ्य पर होने वाले अच्छे परिणामों की जानकारी दी। डॉ मनोज कुमार (कृषि वानिकी) ने फसल अवशेषों तथा कृषि वानिकी के महत्व से संबंधित तथ्यों पर जानकारी साझा की।
कृषि विभाग से उप निदेशक गिरीश नागपाल ने प्रदेश सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन पर चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी। रिटायर्ड वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ ओ. पी. लठवाल ने फसल विविधीकरण अपनाने के बारे में संपूर्ण जानकारी किसानों से साझा की। कृषि विभाग के अधिकारी भारत वाही ने फसल अवशेष प्रबंधन के अंतर्गत कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी व पंजीकरण के बारे में किसानों को विस्तार से बताया।
कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ बलजीत सिंह सहारण ने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा समय-समय पर फसल अवशेष प्रबंधन को जिले में बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता कार्यक्रम, खेत दिवस और अन्य विभिन्न प्रकार के अभियान चलाये जाते हैं। उन्होंने जिले के किसानों से अपील की फसल अवशेष प्रबंधन की इस मुहिम को सफल बनाने में सभी अपना योगदान दें तथा फसल अवशेषों को आग न लगाकर अपने खेत में ही मिलायें।
इस प्रशिक्षण में आए हुए किसानों ने इस प्रशिक्षण में अपनी सफल भागीदारी दिखाते हुए वैज्ञानिकों और अधिकारियों से अपने अनुभव भी साझा किए।






