कुरुक्षेत्र, 25 सितंबर, 2026 (संजीव शर्मा): चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र द्वारा जिले के गांव धुराला में फसल अवशेष प्रबंधन विषय पर खंड स्तरीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के कुलपति प्रो. बीआर काम्बोज और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ नरेश कौशिक के मार्गदर्शन व दिशा निर्देश के अनुसार कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र द्वारा 25 सितंबर 2026 को किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र के वरिष्ठ समन्वयक डॉ बलजीत सिंह सहारण के नेतृत्व में आयोजित किए गए इस शिविर में किसानों को फसल अवशेषों को मिट्टी में मिलाकर उनका उचित प्रबंधन करने के लिए जागरूक किया गया। कृषि विज्ञान केंद्र कुरुक्षेत्र की वैज्ञानिक डॉक्टर सरिता रानी (सस्य विज्ञान) ने किसानों को फसल अवशेष जलाने से होने वाले नुकसान तथा अवशेष का उचित प्रबंधन करने से होने वाले लाभों के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने जिले में पराली जलाने के मामलों में आई कमी के लिए किसानों के योगदान की सराहना की। कृषि विज्ञान केंद्र के कार्यकलापों तथा गतिविधियों की चर्चा करते हुए उन्होंने किसानों को केवीके से जुडक़र वैज्ञानिक तरीके से खेती करने तथा फसल विविधीकरण अपनाने के लिए प्रेरित किया। केंद्र के वैज्ञानिक डॉक्टर अश्वनी कुमार ने फसल अवशेष प्रबंधन में प्रयोग होने वाली मशीनों तथा फसलों में होने वाली बीमारियों की पहचान तथा उनकी रोकथाम के बारे में जानकारी दी।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय, धुराला की कृषि विषय की अध्यापिका शालिनी ने कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किये जा रहे जागरूकता कार्यकर्मों की सराहना करते हुए कहा कि धुराला गांव के विद्यार्थियों को अपनी पढ़ाई पर थोड़ा जोर देना चाहिए ताकि विश्वविद्यालय द्वारा डिग्री के लिए दी जाने वाली सीट की सुविधा का लाभ लिया जा सके। गांव के सभी माता पिता अपने बच्चों को प्रोत्साहित करें कि मेहनत करके इन सीटों पर जाकर पढ़ाई करें व कृषि के क्षेत्र में करियर बनाकर अपना योगदान दें। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा समय-समय पर फसल अवशेष प्रबंधन को जिले में बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रशिक्षण कार्यक्रम, जागरूकता कार्यक्रम, खेत दिवस, किसान मेला और अन्य विभिन्न प्रकार के कार्यक्रम चलाए जाते है।

उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि फसल अवशेष प्रबंधन की इस मुहिम को सफल बनाने में सभी अपना योगदान दें तथा फसल अवशेषों को आग न लगाकर अपने खेत में ही मिलायें। इस कार्यक्रम में अपनी सफल भागीदारी दिखाते हुए गांव के किसानों ने वैज्ञानिकों की बातों को ध्यान से सुना और अपने अनुभव भी उनसे सांझा किए। यह कार्यक्रम आईसीएआर अटारी जोन 2, जोधपुर के अन्तर्गत 2018 से चलाए जा रहे फसल अवशेष प्रबंधन प्रोजेक्ट के अंतर्गत आता है। कार्यक्रम में 100 से अधिक किसानों तथा छात्रों ने शिरकत की। गांव धुराला के कोआपरेटिव सोसाइटी के रविन्द्र सिंह ने अपने गांव के किसानों की अवशेष प्रबंधन में लगन को खूब सराहा तथा इस कार्यक्रम के आयोजन के लिए कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों का धन्यवाद किया।






