Thursday, October 1, 2026
HomeHaryanaकुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और एस.जे.एच.आई.एफ.एम. के बीच शोध और नीति अध्ययन को बढ़ावा...

कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय और एस.जे.एच.आई.एफ.एम. के बीच शोध और नीति अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए हुआ एम.ओ.यू.

कुरुक्षेत्र, 01 अक्टूबर, 2026 (संजीव शर्मा):  हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी की मौजूदगी में बुधवार को ‘हरियाणा की अपनी कर-राजस्व व्यवस्था’ को मजबूत करने के लिए आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर स्वर्ण जयंती हरियाणा इंस्टीट्यूट फॉर फिस्कल मैनेजमेंट (एसजेएचआईएफएम) और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, कुरुक्षेत्र के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता हरियाणा में अकादमिक शोध, नीति अध्ययन और साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।

एसजेएचआईएफएम की ओर से डॉ. राज नेहरू और कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की ओर से कुलपति प्रो. सोम नाथ सचदेवा ने एमओयू का आदान-प्रदान किया। एमओयू का मुख्य उद्देश्य एसजेएचआईएफएम को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के एक एक्स्ट्राम्यूरल रिसर्च सेंटर के रूप में स्थापित करना है, जहां राजकोषीय प्रबंधन, सार्वजनिक नीति, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के अनुरूप बजट आवंटन, डेटा आधारित सुशासन और अन्य संबंधित अंतर-विषयक क्षेत्रों में डॉक्टोरल शोध किया जा सकेगा। यह व्यवस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और विश्वविद्यालय के लागू नियमों के तहत होगी।

इस सहयोग के तहत शोधकर्ताओं को एसजेएचआईएफएम में अपने मुख्य शोध कार्य करने का अवसर मिलेगा और साथ ही वे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की अकादमिक विशेषज्ञता तथा शोध वातावरण का लाभ उठा सकेंगे। दोनों संस्थान आपसी हित के क्षेत्रों में संयुक्त शोध परियोजनाओं, नीति अध्ययनों, प्रकाशनों, वर्किंग पेपर, सम्मेलनों, सेमिनारों और अन्य अकादमिक एवं नीति-केंद्रित गतिविधियों को भी बढ़ावा देंगे।

एमओयू के तहत योग्य एसजेएचआईएफएम शोधकर्ताओं और फैकल्टी सदस्यों को कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की निर्धारित अकादमिक प्रक्रिया के माध्यम से पीएचडी सुपरवाइजर के रूप में मान्यता दिए जाने पर भी विचार किया जा सकेगा। पंजीकृत शोधकर्ता आवश्यक अनुमति और गोपनीयता संबंधी प्रावधानों के तहत दोनों संस्थानों की संबंधित शोध सुविधाओं, डेटासेट और ज्ञान संसाधनों का उपयोग कर सकेंगे।

इस एमओयू के लिए एसजेएचआईएफएम के सलाहकार प्रो. आर.एस. राठौर ने समन्वय किया। उनके प्रयासों से दोनों संस्थानों के बीच इस संस्थागत सहयोग को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान मिला।

यह पहल हरियाणा में एक मजबूत शोध तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रभावी सुशासन, मजबूत राजकोषीय प्रबंधन, सतत विकास और बेहतर सार्वजनिक नीति निर्माण के लिए साक्ष्य-आधारित ज्ञान को बढ़ावा मिलेगा।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments