Wednesday, November 4, 2026
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मन की बात: पी.एम. मोदी ने ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने की अपील की, पंजाब की प्राकृतिक कपास खेती और हेवल नदी के पुनर्जीवन का किया जिक्र

नई दिल्ली, 25 अक्टूबर, 2026 (गुरमीत सिंह तुंग): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में स्थानीय कारीगरों के उत्पादों को प्राथमिकता देने और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करने का आह्वान किया। दिवाली की तैयारियों के बीच उन्होंने भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों में मिल रही पहचान का उल्लेख करते हुए बिहार के मखाना, कर्नाटक की अरहर दाल, महाराष्ट्र के आदिवासी उत्पादों और खादी की बढ़ती लोकप्रियता पर प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा कि स्थानीय उत्पादों को अपनाने से उन कारीगरों और उत्पादकों को प्रोत्साहन मिलता है, जिनके कौशल और मेहनत से देश की पारंपरिक विरासत संरक्षित रहती है।

पंजाब में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा देने की पहल

प्रधानमंत्री मोदी ने पंजाब के मालवा क्षेत्र में पारंपरिक कृषि पद्धतियों और प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित करने के प्रयासों का भी जिक्र किया। उन्होंने ‘खेती विरासत मिशन’ नामक संगठन की पहल के तहत शुरू किए गए ‘नव-त्रिंजन’ अभियान का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य प्राकृतिक तरीके से कपास की खेती को बढ़ावा देना है।

प्रधानमंत्री के अनुसार, इस पहल के तहत रसायनों के इस्तेमाल के बिना जैविक कपास उगाने के साथ-साथ प्राकृतिक रंगों वाली कपास की किस्मों पर भी काम किया जा रहा है। ऐसी कपास से तैयार धागे और कपड़े को रंगने के लिए अलग से रासायनिक रंगों की आवश्यकता कम करने का प्रयास किया जाता है। इससे पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को कम करने और पारंपरिक कृषि ज्ञान को बढ़ावा देने की संभावनाएं सामने आती हैं।

मोदी ने इस पहल को प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ खेती की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास के रूप में प्रस्तुत किया। पंजाब के मालवा क्षेत्र में कपास की खेती किसानों की आजीविका से जुड़ी है, ऐसे में प्राकृतिक खेती के प्रयोग कृषि और पर्यावरण दोनों के लिहाज से अहम माने जा रहे हैं।

हेवल नदी को पुनर्जीवित करने में ग्रामीणों के प्रयासों की सराहना

‘मन की बात’ में प्रधानमंत्री ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में हेवल नदी और उसके आसपास के प्राकृतिक जलस्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए स्थानीय लोगों की ओर से किए गए प्रयासों की भी सराहना की।

उन्होंने बताया कि एक समय नदी में पानी का प्रवाह कम होने लगा था और आसपास के कई प्राकृतिक जलस्रोत सूखने की स्थिति में पहुंच रहे थे। इसके बाद स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर नदी के संरक्षण के लिए अभियान चलाया। इस दौरान वर्षा जल को रोकने, पानी को जमीन के भीतर पहुंचाने और बड़े पैमाने पर पौधारोपण जैसे उपाय किए गए।

प्रधानमंत्री के मुताबिक, सामूहिक प्रयासों से हेवल नदी को नया जीवन देने और क्षेत्र के कई प्राकृतिक जलस्रोतों के पुनर्जीवन में मदद मिली। उन्होंने इस उदाहरण के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण की सुरक्षा में जनभागीदारी के महत्व को रेखांकित किया।

‘मन की बात’ को बताया जन-प्रयासों से जुड़ने का माध्यम

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि ‘मन की बात’ उनके लिए देश के नागरिकों के प्रयासों को करीब से जानने और समाज के लिए योगदान देने वाले लोगों के कार्यों को नमन करने का अवसर है। कार्यक्रम में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने, पारंपरिक कृषि पद्धतियों को प्रोत्साहित करने और जलस्रोतों के संरक्षण से जुड़े उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने नागरिक भागीदारी तथा स्थानीय स्तर पर किए जा रहे सकारात्मक प्रयासों के महत्व को सामने रखा।

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