नई दिल्ली, 27 अक्टूबर, 2026 (चौधरी प्रभजीत सिंह): आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर बढ़ते निवेश के बीच वैश्विक टेक कंपनियों में रोजगार और भर्ती को लेकर नई चुनौतियां सामने आ रही हैं। माइक्रोसॉफ्ट की ओर से लगभग 60,000 कर्मचारियों को स्वैच्छिक बायआउट ऑफर दिए जाने की खबर ने इस बहस को तेज कर दिया है। हालांकि, यह ऑफर कंपनी के कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक है और इसे सीधे तौर पर इतनी नौकरियों की कटौती नहीं माना जा सकता।
टेक सेक्टर में ए.आई. का असर दो स्तरों पर दिखाई दे रहा है। पहला, ग्राहक सेवा, नियमित प्रशासनिक कार्य और दोहराए जाने वाले कामों में ए.आई. टूल्स के बढ़ते इस्तेमाल से कुछ पदों की जरूरत कम हो रही है। दूसरा, ए.आई. इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश के कारण कंपनियां अन्य खर्चों की समीक्षा कर रही हैं, जिसका असर भर्ती और कर्मचारियों की संख्या पर भी पड़ सकता है।
Salesforce सहित कुछ कंपनियों ने ग्राहक सहायता जैसे क्षेत्रों में ए.आई. एजेंटों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया है। वहीं, भारतीय आई.टी कंपनियों के सामने भी बदलती ग्राहक मांग, नए ए.आई. टूल्स और भर्ती की रणनीति को लेकर चुनौतियां हैं।
हालांकि, ए.आई. के कारण सभी क्षेत्रों में नौकरियां खत्म नहीं हो रही हैं। ए.आई.इंजीनियरिंग, डेटा, साइबर सुरक्षा और क्लाउड कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में कुशल पेशेवरों की मांग भी बढ़ रही है। भारत में भी आई.टी. कंपनियों के सामने एक ओर कर्मचारियों की संख्या और लागत को नियंत्रित करने की चुनौती है, तो दूसरी ओर नए कौशल वाले कर्मचारियों की भर्ती की जरूरत बनी हुई है।
विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले समय में रोजगार पर ए.आई. का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां नई तकनीक को किस गति से अपनाती हैं, कितने काम स्वचालित होते हैं और कर्मचारियों को नए कौशल सीखने के कितने अवसर मिलते हैं। माइक्रोसॉफ्ट के स्वैच्छिक बायआउट ऑफर से कितने कर्मचारी बाहर निकलते हैं, यह भी इसके वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा।






